भारत नेट के तहत 1,43,885 ग्राम पंचायते इंटरनेट सेवा प्रदान करने को तैयार लेकिन 1 लाख से ज्यादा पंचायतों को अब भी तेज इंटरनेट की दरकरार

भारत नेट के तहत 1,43,885 ग्राम पंचायते इंटरनेट सेवा प्रदान करने को तैयार लेकिन 1 लाख से ज्यादा पंचायतों को अब भी तेज इंटरनेट की दरकरार - Panchayat Times
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नई दिल्ली. साल 2011 की तत्कालीन यूपीए-2 की सरकार द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क परियोजना की शुरुआत हुए 9 साल हो गये है. इसका लक्ष्य देश की ढ़ाई लाख पंचायतों को 100 एमबीपीएस के स्पीड के ब्रॉडबैंड कनेक्शन से जोड़ना था.

परियोजना के तहत स्कूल, स्वास्थ्य केन्द्र एवं कौशल विकास केन्द्र को मुफ्त में इंटरनेट कनेक्टिविटी देने का प्रावधान है.

एनडीए सरकार ने इस परियोजना का नाम बदलकर भारत नेट कर दिया

एनडीए सरकार ने इस परियोजना का नाम बदलकर भारत नेट कर दिया और काम में तेजी लाने के लिए डेली-मॉनिटरिंग जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए. डिजिटल इंडिया के लिए इस परियोजना को काफी अहम माना जा रहा था.

1,43,885 ग्राम पंचायते सेवा प्रदान करने को तैयार

इस योजना को लेकर 16 सितंबर को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्य संचार मंत्री संजय धोत्रे ने कहा कि 4 सितंबर देश की कुल 2,53,268 ग्राम पंचायतों में से 1,43,885 ग्राम पंचायते सेवा प्रदान करने को तैयार है.

मंत्री ने आगे बताया की देश के गांव में सबसे ज्यादा दिल्ली के 98.97% लोगों के पास इंटरनेट की सुविधा है, जबकि जम्मू और कश्मीर में सबसे कम लोगों के पास इंटरनेट की सुविधा उपल्बध है.

Internet service in India

इंटरनेट की सुविधा एक बड़ी समस्या

‘इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ के मुताबिक मार्च, 2019 तक भारत की 45 करोड़ आबादी तक ही इंटरनेट की पहुंच थी. यानी लगभग 35 फीसदी लोग ही इंटरनेट का इस्तेमाल कर पा रहे हैं. एक अध्ययन के मुताबिक विश्वविद्यालय में पढ़ रहे महज 12 फीसदी छात्रों के घरों में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है.

राष्ट्रीय सैंपल सर्वे संगठन के आंकड़ों के मुताबिक विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले 85 फीसदी शहरी छात्रों के पास इंटरनेट है, लेकिन इनमें से 41 फीसदी ही ऐसे हैं जिनके पास घर पर भी इंटरनेट है जबकि उच्च शिक्षा हासिल कर रहे ग्रामीण छात्रों में से सिर्फ 28 फीसदी के घरों तक ही इंटरनेट की पहुंच है. राज्यवार देखें तो, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में 7 से 8 फीसद ग्रामीण परिवारों में ही इंटरनेट उपलब्ध है.