गांधी जयंती पर झारखंड सरकार ने 127 कैदियों को दी आजादी

झारखंड के विभिन्न जिलों से 127 कैदियों को रिहा किया गया - Panchayat Times

रांची. गांधी जयंती के अवसर पर सरकार के आदेश पर सोमवार को झारखंड के विभिन्न जिलों से 127 कैदियों को रिहा किया गया. दो अन्य कैदियों को अर्थ दंड देने के बाद छोड़ा जाएगा. अधिकारिक सूत्रों के अनुसार इनमें बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से 36, हजारीबाग जिले के लोकनायक जय प्रकाश नारायण केंद्रीय कारागार से 18, दुमका केंद्रीय कारागार से 32, घाघीडीह केंद्रीय कारागार से 24 और केंद्रीय कारा पलामू से 14 कैदियों को रिहा किया गया है. साथ ही मंडल कारागाह गढ़वा, मंडल कारा गिरिडीह और उपकारा रामगढ़ से एक-एक कैदी को रिहा कर दिया गया है. इनमें अधिकतर आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे. रिहा होने के बाद किसी के 20 साल बाद बेटी से मिलने की खुशी थी तो किसी के चेहरे पर परिवार से मिलने की बैचेनी दिख रही थी.

मुख्यमंत्री की बंदी-रिहाई राज्य स्तरीय सजा पुनरीक्षण पर्षद की बैठक में इन बंदियों को छोड़ने का निर्णय लिया गया था. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से रिहा हुए 36 कैदियों को गांधी टोपी पहनाकर जेल से बाहर निकाला गया. बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के दो कैदियों को दंड शुल्क देने के बाद रिहा किया जायेगा. कैदियों ने ईमानदारी से जीवन यापन करने की शपथ ली. जेल से निकलने से पहले जेल प्रशासन ने रिहा किए गए सभी कैदियों से यह शपथ पत्र भी भरवाया कि भविष्य में ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे किसी दूसरे को परेशानी हो.

एक ऑटो खरीदेंगे और उसी से अपना जीवन यापन करेंगे

खूंटी के रहने वाले बासु साहू ने बदले की आग में जलाकर एक व्यक्ति की इसलिए हत्या कर दी थी क्योंकि उसने उनके एक करीबी की हत्या की थी. हत्या के बाद बंसी को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी. जेल से निकलने के बाद बासु काफी खुश नजर आये उनके अनुसार अब वो एक ईमानदारी भरा जीवन यापन करेंगे और समाज के विकास में अपना योगदान देंगे. जेल में रहते हुए उन्होंने पैसे कमाए हैं, जिससे वह अपना एक छोटा सा व्यापार शुरू करेंगे और उसी से अपने परिवार का पालन-पोषण करेंगे. रांची के तमाड़ के रहने वाले क्रांति खंडित ने बताया कि जेल में रहते हुए ही बीए की परीक्षा पास की है. आवेश में आकर अपने ही गांव के एक व्यक्ति की उसने हत्या कर दी थी. जिसके बाद उन्हें भी आजीवन कारावास की सजा दी गई थी. क्रांति ने बताया कि जेल में रहते हुए जो पैसे कमाए हैं उससे वो एक ऑटो खरीदेंगे और उसी से अपना जीवन यापन करेंगे.

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मालमू हो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सभी राज्य के जेलों में वर्षों से आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों के लिए राज्य स्तरीय सजा पुनरीक्षण पर्षद का गठन किया गया है. राज्य भर के सभी सेंट्रल जेल से वैसे बंदियों की सूची रखी जाती है, जिनका आजीवन कारावास की सजा काटने के दौरान शालीन, सभ्य चरित्र होता है. 18 साल जेल में रहने के दौरान उन पर किसी तरह का कोई विवाद नहीं होता है. वैसे बंदियों को छोड़ने का अधिकार राज्य स्तरीय सजा पुनरीक्षण पर्षद को है. राज्य स्तरीय सजा पुनरीक्षण परिषद ने 129 कैदियों को रिहा करने का निर्णय लिया था.