झारखंड में लागू होगा 1932 का खतियान : शिबू सोरेन

झारखंड में लागू होगा खतियान : शिबू सोरेन-Panchayat Times

रांची. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के पिता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शिबू सोरेन ने स्थानीय नीति पर बड़ा बयान देते हुए बुधवार को कहा कि राज्य में उनकी सरकार स्थानीयता नीति में बदलाव करेगी और इस राज्य के आदिवासी और मूलवासी के हकों के लिए 1932 का खतियान लागू किया जाएगा.

शिबू सोरेन ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘पिछली सरकार की स्थानीयता नीति में राज्य का वासी माने जाने के लिए कट ऑफ वर्ष 1985 रखा गया था जो स्थानीयता नीति के लिये सही नहीं था. इस कारण झारखंड के लोग अपने हक से वंचित रह गए.’’ उन्होंने कहा कि जो यहा के खतियानी और पुराने निवासी हैं उनका राज्य के रोजगार पर पहला हक बनता है. वर्ष 1985 को आधार बनाकर नीति बनाना सही नहीं है. 1932 का खतियान या जो भी अंतिम खतियान है चाहे वह 1934 का हो या 1936 का उसी के आधार पर स्थानीयता तय की जानी चाहिये.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि खतियान के आधार पर स्थानीयता तय किये जाने से यहां के जंगलों में रहने वाले मूलवासी आदिवासियों को पलायन नहीं करना पड़ेगा.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने विपक्ष के जो साथी इससे सहमत हैं कि राज्य के मानव संसाधनों के लिए बनी संभावनाएं खतिहान के आधार पर परिभाषित स्थानीयता नीति से सुरक्षित रहेंगी तो फिर देश की संभावनाओं को गैरकानूनी ढंग से आए घुसपैठियों से बचाने के लिए बने #CAA पर भी उनका यह अप्रासंगिक विरोध क्यों?

शिबू सोरेन के इस बायन के बाद झारखंड भाजपा प्रवक्ता दीन दयाल वर्णवाल ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिबू सोरेन के इस तरह के बयान से झारखंड में एक बार फिर अस्थिरता का माहौल पैदा हो सकता है. पिछली सरकार ने झारखंड अगल राज्य बनने से 15 साल पहले से यहां रहने वालों को स्थानीय माना और इसी आधार पर स्थानीय नीति बनायी है.ताकि राज्य सौहार्दपूर्ण माहौल में आगे बढ़ सके. लेकिन अब फिर इस मुद्दे पर सूबे में भय का वातावरण बनाने का प्रयास हो रहा है.

खतियान क्या है

खतियान ( खतयोनि ) शब्द से बना है. जिस कागजात में मौजे के पूरा वर्णन के साथ-साथ प्रत्येक किसान के नाम , पिता का नाम , रकवा , प्लाट नंबर , मौजे काम नाम , परगना , तौजी नंबर , जिला , सरकार का नाम तथा आसामी का पूरा पता जिस कागजात में लिखे जाते है. उसे खतियान कहते है
इस खतियान में प्रत्येक किसान के प्लाट का क्षेत्रफल एकड़ , डेसीमल और हेक्टेयर में वर्णित रहता है. इस खतियान में भु स्वामी के भूमि से संबंधित जो अधिकार अभिलेख या प्रतिलिपि दिया जाता है.