खूंटी : पत्थलगड़ी को लेकर जिले में दर्ज हैं 23 मुकदमे

पत्थलगड़ी समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई हिंसक घटना दुर्भाग्यपूर्ण : मुख्यमंत्री सचिवालय - Panchayat Times

खूंटी. पत्थलगड़ी कानून को लेकर खूंटी जिले के विभिन्न थानों में कुल 23 मामले दर्ज हैं. इनमें कांकी में प्रशासनिक अधिकारियों को रात भर बंधक बनाने, कोचांग सामूहिक दुष्कर्म कांड जैसे संगीन मुकदमें भी शामिल हैं. पत्थलगड़ी को लेकर अब तक 45 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी. पत्थलगड़ी के मास्टर माइंड युसूफ पूर्ति उर्फ प्रोफेसर, बेलोसा बबिता कच्छप सहित 80-85 आरोपित अब भी फरार हैं.

सरकार द्वारा पत्थलगड़ी से संबंधित मुकदमों को वापस लेने की घोषणा से आरोपितों ने राहत की सांस ली है. जानकारी के अनुसार पत्थलगड़ी के अग्रणी नेता जो अब तक फरार हैं, उनमें युसूफ पूर्ति, बबिता कच्छप, सुखराम मुंडा, बिरसा मुंडा, नथनियेल मुंडा, बआलगोविंद तिर्की, बलराम समद, पावेल टूटी, चमरा मुंडा, चरका मुंडा, नागेष्वर मुंडा, विकास टूटी, बीजू पाहन, सनिका मुंडा, सोमा मुंडा आदि शामिल हैं. इन सभी लोगों पर असंवैधानिक पत्थलगड़ी कर समाज में वैमनस्यता फैलाने, सरकारी काम में बाधा डालने, देष विरोधी काम करने, बिना इजाजत के निजी बैंक खोलने सहित अन्य सुसंगत धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं.

इसके अलावा कोचांग में सांस्कृतिक दल की महिलाओं का अपहरण कर उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने, सरकारी स्कूलों को बंद करने, ग्रामसभा बैंक खोलकर ग्रामीणों की राशि हड़पने, तत्कालीन सांसद कड़िया मुंडा के आवास की रक्षा में लगे पुलिस कर्मियों का अपहरण करने,उनका हथिया लूटने आदि के मामले भी खूंटी जिले के मुरहू, अड़की और खूंटी थाने में मामले दर्ज हैं.

क्या है पत्थलगड़ी

जनजातीय समाज में किसी के मरने, जाति से निष्कासित होने जैसे मामलों को लेकर गांव या गांव की सीमा पर पत्थलगड़ी की परंपरा है. 2016-17 में युसूफ पूर्ति, बेलोसा बबिता कच्छप जैसे स्वयंभू आदिवासी नेताओं के बहकावे में आकर ग्रामीणों ने कई गांव में पत्थलगड़ी कर सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और गैर आदिवासियों के गांव में प्रवेश पर रोक लगा दी थी. इन नेताओं का कहना था कि आदिवासी देश के राजा हैं. गैर आदिवासी उनकी प्रजा है. सभी अधिकारी आदिवासियों के नौकर हैं.

खुद को राजा मानते हुए सैकड़ों आदिवासियों ने अपना वोटर कार्ड, राशन कार्ड, आधार कार्ड सहित अन्य जरूरी कागजात जला दिये. यहां तक कि ग्रामीणों ने किसी तरह की सरकारी योजना का लाभ लेना बंद कर दिया था. 25 अगस्त को कांकी गांव के बाहर लगे बैरियर को हटाने गये लगभग 40 प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को गांव वालों ने बंधक बना लिया था. पत्थलगड़ी समर्थकों ने एसपी, डीएसपी, एसडीओ, डीडीसी सहित लगभग एक दर्जन पुलिस इंस्पेक्टर को रात भर बंधक बनाये रखा था.

इतना ही नहीं, पत्थलगड़ी समर्थकों ने 24 जून को तत्कालीन सांसद कड़िया मुंडा के आवास की सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मियों का अपहरण कर उनके हथियार लूट लिये थे. इस घटना के बाद प्रषासन द्वारा कड़ाई बरतने और पत्थलगड़ी के बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद ही जिले में पत्थलगड़ी का मामला शांत हुआ था.

क्या है नई सरकार का रुख

झारखंड के नये मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के शपथ लेने के साथ ही उनकी सरकार ने बड़े फैसले लेना आंरभ कर दिया है. रविवार देर शाम को झारखंड मंत्रालय में हुई पहली ही कैबिनेट बैठक में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) एवं संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी एक्ट) में संशोधन के विरोध करने के फलस्वरूप और पत्थलगड़ी करने के क्रम में जिन व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर मुकदमे दायर किए गए हैं, उन्हें वापस लेने का निर्णय लिया गया.