थलौट हादसे में मारे गए छात्रों की याद में छलक पड़े परिजनों के आंसू

चार साल पहले मंडी जिला के थलौट में ब्यास नदी की कोख में समाए हैदराबाद के इंजिनियरिंग कॉलेज के 24 छात्रों के परिजन
इन्हीं लहरों में कहीं समा गए थे जिगर के टुकड़े घटना स्थल को देखते परिजन

मंडी. चार साल पहले मंडी जिला के थलौट में ब्यास नदी की कोख में समाए हैदराबाद के इंजिनियरिंग कॉलेज के 24 छात्रों के परिजन हादसा स्थल पर पहुंचे. साल 2014 के थलौट ब्यास हादसे में मारे गए 24 इंजीनियरिंग छात्रों के कुछ परिजनों ने हादसा स्थल पर पहुंच कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.

चार साल पहले के इस हादसे की स्मृतियों में डूबे परिजनों की आंखों से अपने कलेजे के टुकड़ों की याद में आंसू टपक पड़े. वहीं, कुछ मृतक छात्रों के परिजन छाती पीट-पीट कर रोते बिलखते अपने मन का गुबार शांत कर पाए.

नदी के बीच फोटो खिंचवाते समय हुआ था हादसा 

चार साल पहले ब्यास नदी के बीचों-बीच फोटो खिंचवाते समय यह हादसा हुआ था. हादसे के वक्त जिस पत्थर पर 24 इंजीनियरिंग छात्र फोटो खिंचवा रहे थे उसे देख परिजन लगभग दो घंटे तक एकटक निहारते रहे और अपने मोबाइल में उनके चित्र देख यादों में खो गए. इस दौरान मंडी प्रशासन की ओर से एक अधिकारी और पुलिस के जवान मौके पर मौजूद रहे.

गलत पहचान से नहीं कर पाए बेटे का अंतिम संस्कार

हैदराबाद से के.आर.वी.के. प्रसाद का कहना है कि विगनाना ज्योति इंस्टीच्यूट ऑफ इंजीनियरिंग कॉलेज के एक प्रोफैसर की गलत पहचान से उसके बेटे केसरी हर्षा की लाश उन्हें नहीं मिल पाई क्योंकि घटना के बाद प्रशासन ने उन्हें पांच दिन बाद वापस घर भेज दिया था और घर पहुंचते ही एम. शिवा प्रकाश की लाश तो आई लेकिन उनके बेटे केसरी हर्षा की लाश नहीं पहुंची.

कुछ दिन बाद एम. शिवा प्रकाश के नाम से और लाश आ गई तो वे हैरान रह गए जिससे उन्हें काफी मानसिक परेशानी हुई और डी.एन.ए. तक करवाना पड़ा. बाद में जांच से पता चला कि बच्चों के साथ घूमने गए कॉलेज के एक प्रोफेसर की गलत पहचान से उनके बेटे की लाश किसी और परिवार को भेज दी गई और उन्होंने उसका अंतिम संस्कार अपने बेटे की लाश समझकर किया और बाद में जब दूसरी लाश आई तो वह उनके ही बेटे की निकली जिससे दोनों लाशों का अंतिम संस्कार एक ही परिवार कर पाया जबकि के.आर.वी.के. प्रसाद का परिवार आज भी बेटे की लाश के दर्शन से वंचित है. लिहाजा वे चार वर्ष बाद सभी बच्चों की आत्मा की शांति के लिए थलौट आए हैं.

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राम मोहन राव ने खोया था इकलौता बेटा

हादसे में अपने एकमात्र लाल ऋत्विक को खोने वाले राम मोहन राव अब बिना औलाद के अपनी पत्नी के साथ दिन काट रहे हैं. यहां नम आंखों के साथ राम मोहन राव ने कहा कि ऋत्विक और केसरी हर्षा आपस में दोस्त थे. दोनों साथ रहते थे और घटना के दिन उसने पौने सात बजे बेटे के फोन पर बात करनी चाही तो उसके किसी साथी ने फोन उठाकर बताया कि उनका बेटा यहां बाजार में कहीं खो गया और फोन काट दिया. थोड़ी देर बाद टी.वी. पर समाचार आया कि हिमाचल में घुमने आए छात्र पानी में बह गए तो उससे उन्हें आघात लगा. एक अन्य अभिभावक ने बताया कि उनका एक ही बेटा था और उसकी जान चले जाने के बाद उन्होंने अपना 144 करोड़ सालाना टर्न ओवर का कारोबार करना ही छोड़ दिया है.

चार साल पहले मंडी जिला के थलौट में ब्यास नदी की कोख में समाए हैदराबाद के इंजिनियरिंग कॉलेज के 24 छात्रों के परिजन
थलौट हादसा स्थल पर फूट-फूट कर रोते परिजन

परिजनों ने कालेज प्रबंधन पर किया है केस

परिजनों ने इस पूरे मामले में विगनाना ज्योति इंस्टीच्यूट ऑफ इंजीनियरिंग कॉलेज की कथित लापरवाही पर कोर्ट केस कर रखा था और अब सुनवाई में ये बात सामने आई है कि कॉलेज प्रबंधन उनके बच्चों को इंडस्ट्रियल टूर के बहाने यहां लाया और बिना स्थानीय कोच हायर किए बच्चों को रिस्की पर्यटन स्थलों की ओर ले गए जिससे उनके बच्चों को अपने प्राण प्रबंधन के फैकल्टी मेंबर और गाईड की लापरवाही से त्यागने पड़े. हादसे में लारजी डैम से अचानक पानी छोड़े जाने से 18 छात्र, 6 छात्राएं और एक टूर आप्रेटर की मौत हो गई थी.