जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल को मिले 32 करोड़

कुल्लू. प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए इस वित्त वर्ष में 32 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि वर्ष 2022 तक हिमाचल को जैविक खेती युक्त राज्य का दर्जा हासिल हो सके. डॉ. रामलाल मारकंडा रविवार को शमशी में  मक्का की फसल पर आयोजित 61वीं वार्षिक कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उक्त बातें कही.

तीन दिवसीय कार्यशाला में 25 राज्यों के कृषि वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं. डॉ. मारकंडा ने कहा कि किसानों की आय को दोगुणा करने के सरकार के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद अति आवश्यक है. मालूम हो कि कार्यशाला का आयोजन भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान लुधियाना और चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के पहाड़ी कृषि अनुसंधान एवं प्रसार केंद्र बजौरा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है.

कृषि मंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों-बागवानों को रासायनिक खादों और कीटनाशकों के दुष्प्रभावों की जानकारी दें ताकि वे इनके प्रयोग के बजाय जैविक खेती को अपनाने के लिए तैयार हो सकें. डॉ. मारकंडा ने कहा कि हिमाचल के दस जिलों में मक्के की खेती की जाती है और इसका उत्पादन बढ़ाने की बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं. खाद्यान्न के अलावा पशु-चारे, मुर्गी पालन तथा विभिन्न उत्पादों में भी मक्की का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है.

डॉ. मारकंडा ने कहा कि हिमाचल के कृषि विज्ञान केंद्रों को अनुसंधान कार्यों के लिए केंद्र सरकार से पर्याप्त बजट का प्रावधान करवाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे. मौके पर उन्होंने देश के विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों की पांच पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया. उन्होंने मक्के पर व्यापक शोध करने वाले पूर्व वैज्ञानिकों डॉ. एसके भल्ला और डॉ. बीके शर्मा को विशेष रूप से सम्मानित किया.

कार्यशाला में कृषि मंत्री का स्वागत करते हुए कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति अशोक कुमार सरियाल ने विवि की तरफ से किए गए विभिन्न अनुसंधान कार्यों की जानकारी दी. उन्होंने वैज्ञानिकों को कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए अनुसंधान कार्यों को गति प्रदान करने की अपील की. कृषि मंत्रालय के कृषि आयुक्त एसके मल्होत्रा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्रों को एकीकृत बीज विकास केंद्रों से जोड़ा जाएगा.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. आईएस सोलंकी और भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान लुधियाना के निदेशक सुजय रक्षित ने मक्के के संबंध में किए जा रहे शोध कार्यों का ब्योरा दिया. कृषि विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ. आरएस जमवाल ने मुख्य अतिथि, अन्य अतिथियों तथा सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया.

मौके पर बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी, द्रंग के विधायक जवाहर ठाकुर, कृषि विभाग के निदेशक देशराज शर्मा, पहाड़ी कृषि अनुसंधान एवं प्रसार केंद्र बजौरा के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. डीआर ठाकुर, कृषि विवि के प्रसार निदेशक डॉ. अतुल और अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक मौजूद रहे.