400 साल पुराना शिव मंदिर राष्ट्रीय धरोहर घोषित, पर्यटन स्थल विकसित करने के लिए पर्याप्त जमीन नहीं

400 साल पुराना शिव मंदिर राष्ट्रीय धरोहर घोषित, पर्यटन स्थल विकसित करने के लिए पर्याप्त जमीन नहीं - Panchayat Times

रामगढ़. शहर से तकरीबन 3 किलोमीटर दूर एनएच-23 रामगढ़-गोला मार्ग पर कैथा गांव में प्राचीन शिव मंदिर स्थित है. इस प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास लगभग 400 साल पुराना है. मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि रामगढ़ राज परिवार के दलेर सह बहुत बड़े शिवभक्त थे. इनके द्वारा ही इस गुफानुमा मंदिर को बनवाया गया था.

दलेर ¨सह का एक किला रामगढ़ में भी था, जो अभी राजागढ़ के नाम से जाना जाता है. मंदिर के समीप एक तालाब भी है, जो राजा-महाराजाओ के काल में ही बनी थी. मंदिर के बेलनकार गुंबद के ठीक निचले हिस्से में गुफा मार्ग है जो कूप की आकर में है, इसी गुफा से तालाब एवं राजागढ़ दामोदर नदी के किनारे लगभग तीन किमी राजा किला तक सुरंग बनी थी. इसी सुरंग से होकर रामगढ़ राजा व उनका परिवार मंदिर में पूजा अर्चना के लिए आना-जाना करते थे.

स्थानीय लोगो का कहना है कि इसी गुफा के ठीक सामने अभी भी एक कमरा है इस कमरे के लिए न तो कोई द्वार है और न ही खिड़कीयां है, पूरी तरह से बंद है. पता नही इस कमरे के भीतर क्या है, आज तक पुरातत्व विभाग भी न जान सका. कुछ साल पहले चोरो के द्वारा इस कमरे को चोरी के मंतव्य से छिद्र करने का प्रयास किया गया था, पर दिवार की मोटाई अधिक होने के कारण छिद्र संभव नही हो सका.

दूसरी मंजिल में स्थापित शिवलिंग के ठीक उपर बेलनकार गुंबद के उपरी हिस्से में एक कूप आकर की गढ्ढा बनी हुई है, जिसमे बारिश के दिनों में पानी संग्रह होती थी और पुरे साल शिवलिंग के ऊपर बूंद- बूंद के जलाभिषेक होती रहती थी. वर्तमान में ये अद्भुत नजारा बंद हो गई है.

16वीं शताब्दी में निम्राण

16वीं शताब्दी में बने इस मंदिर की बनावट में स्थापत्य की अदभुत कला है. इस दो मंजिले मंदिर के बेलनकार गुंबद व उस काल के लखौरी ईंटों का प्रयोग व मंदिर का निर्माण अपने आप में अद्भुत कला है. मंदिर के पिछले हिस्से के एक कोने की दीवार में नीचे से ऊपर तक दरार पड़कर फट जाने के बाद भी मंदिर अभी तक सुरक्षित है. इससे इसकी मजबूती का सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है.

मंदिर की बनावट को बारीकी से देखने से लगता है कि मंदिर के ऊपरी भाग में शिव मंदिर तो नीचे गुफानुमा फौजी पोस्ट था. मंदिर के नीचे भाग के चारो ओर छोड़े गए छोटे-छोटे खिड़कीनुमा दीवार से तैनात राजा के सिपाही तीर-धनुष व अन्य हथियार के साथ तैनात रहते थे.

पुरातत्व विभाग द्वारा राष्ट्रीय धरोहर घोषित

इस मंदिर को भारत सरकार एवं पुरातत्व विभाग द्वारा राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया गया है. लेकिन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पर्याप्त जमीन नहीं है. उसके बाद भी इस मंदिर की सत्यता को देखिए. मंदिर के दूसरी मंजिल में स्थापित शिव शिवलिंग को दर्शन करने काफी दूर-दूर से पर्यटक आते है और पूजा-अर्चना कर अपनी सुरक्षित जीवन की मनोकामना भी करते है.

वहीं ग्रामीणों का झारखंड़ सरकार से निवेदन है कि जिस प्रकार इस मंदिर को राष्ट्रीय धरोहर घोषित की गई है, उसी प्रकार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध किया जाय.