8 साल की मासूम के साथ-साथ हमारी संवेदनाओं का भी क़त्ल हो गया

जम्मू कश्मीर के कठुआ में जो कुछ भी हुआ उस घटना से दिमाग़ सुन्न हो गया है. इस मसले पर कुछ लिखने या पढ़ने की कूव्वत ही ख़त्म हो गई. दिल्ली में हुए निर्भया काण्ड के बाद देश में एक बार फिर इस तरह की घिनौनी और जघन्य घटना को अंजाम दिया गया है.

8 साल की मासूम के साथ कुछ भी हुआ वह इतना घिनौना है कि वह जुबान से भी न निकले, लेकिन इंसान की खाल में छिपे कुछ भेड़ियों ने ऐसी घटना को अंजाम दिया है. एक मासूम से हफ्ते भर तक बार-बार बलात्कार हुआ. उसे नशे की गोलियां दी गईं. उत्तर प्रदेश के मेरठ से भी एक युवक को उसका बलात्कार करने के लिए बुलाया गया. लेकिन यहां तक भी हैवानियत शांत नहीं हुई, पुलिस वाले ने फोन करके कहां कि अभी लड़की को मारना मत, मारने से पहले वह भी रेप करना चाहता है, और किया भी. इसके बात पत्थर से मारकर उसकी हत्या कर दी गई.

इस क्रूर घटना को महज इस लिए अंजाम दिया गया क्योंकि ये दरिंदे वहां से बक्करवाला समुदाय को भगाना चाहते थे. हद तो यह है कि ऐसे राक्षसी काम को एक पवित्र स्थल पर अंजाम दिया गया. मंदिर की देवभूमि पर यह नापाक करतूत की गई. हफ्तेभर तक दवाइयां खिलाकर मुंह काला किया जाता रहा. यही नहीं मुख्य आरोपी बलात्कार करने के बाद वहीं पूजा-पाठ भी करता था.

अभी आपको गुस्सा आ रहा हो तो शांत हो जाइए, क्योंकि जम्मू कश्मीर के कुछ वकीलों के गुस्से के आगे आपका गुस्सा कम पड़ जाएगा. ये लोग हाथ में तिरंगा लेकर जय श्री राम के नारे लगाते हुए प्रदर्शन कर रहे थे. लेकिन अब आप सोच रहे होंगे कि घटना ही ऐसी है, विरोध प्रदर्शन तो होना ही चाहिए. लेकिन ठहरिए ये जो देशभक्ति के ढिंढोरे में अपना गुस्सा ज़ाहिर कर रहे थे, ये उस मासूम के लिए नहीं था. बल्कि इनका गुस्सा पुलिस की ओर से दायर की गई चार्जशीट पर था.

ये ज़रूर गुस्से में प्रदर्शन कर रहे हों, लेकिन आपको ज़रूर शांति से बैठकर अब सोचना ही पड़ेगा कि आखिर कब तक ऐसे इंसानियत को तार-तार कर देने वाले हादसे सहते रहेंगे. कब तक हम ऐसी घटनाओं को दरकिनार कर हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे पर आपस में उलझे रहेंगे. ये इसी का फ़ायदा उठाते हैं. आज देश में कुछ भी मामला होता है उसे बड़े ही आसानी से धर्म और देशभक्ति का चोला पहनाकर पेश किया जाता है और असल मुद्दे से भटका दिया जाता है.

याद होगा राजसमंद की घटना, जहां एक नृशंस हत्या के आरोपी के समर्थन में लोग कोर्ट रूम की छत तक चढ़ गए थे. यहां तक रामनवमी में उसकी झांकी भी निकाली गई थी. ये किस तरह की आस्था और किस तरह की देशभक्ति है. यह किस तरह का रामराज्य है जहां दहशत और तबाही है. रामराज्य में तो सबके भले की बात होती है. फिर ये कौनसा राज्य लाना चाहते हैं.

लेकिन एक हकीकत यह भी है कि धर्म में बलात्कार, हत्या, हिंसा और आतंकवाद को कोई जगह नहीं है. हां बलात्कारियों, हत्यारों, आतंकवादियों का अपना धर्म ज़रूर है. सही रास्ता वही है कि धर्म को देख कर उसपर अमल किया जाए, न कि धर्म को फॉलो करने वालों को. मिलकर ऐसी घिनौनी हरकत करने वालों के खिलाफ एकजुट होना ही पड़ेगा.