9वीं और 10वीं के विद्यार्थी अपनी पसंद से चुन सकते हैं विषय

9वीं और 10वीं के विद्यार्थी अपनी पसंद से चुन सकते हैं विषय-Panchayat Times
फाइल फोटो : साभार इंटरनेट

कोटा. एनसीईआरटी ने जनवरी महीने से कक्षा-9वीं एवं 10वीं के विद्यार्थियों को रूचि, योग्यता और क्षमता के अनुसार विषय का चयन करने के लिए नया स्वैच्छिक एप्टीट्यूड टेस्ट ‘के वाय ए‘ लांच किया है. इस एप्टीट्यूड टेस्ट से विद्यार्थी को कक्षा-11वीं में नया विषय लेने में मदद मिलेगी. कक्षा-10 वीं में ही अपनी योग्यता को जांच कर वह भीड़ से अलग मनपसंद विषय में आगे पढ़ाई कर सकेगा.

यह एक सेल्फ असेसमेंट (स्व-मूल्यांकन) टेस्ट होगा, जिसका कोई सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की पहल पर सीनियर सैकंडरी स्कूल लेवल पर विद्यार्थियों को ह्यूमिनिटी, साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स, वोकेशनल आदि क्षेत्रों में मनपसंद करियर चुनने के विकल्प बताए जाएंगे.

जिससे वह अपने स्किल के अनुसार मनपसंद क्षेत्र में करियर बनाए. इससे देश में स्किल बेस्ड एजुकेशन को प्रोत्साहन मिलेगा. सीबीएसई के एकेडमिक डायरेक्टर डॉ. जोसेफ इमैनुएल ने वेबसाइट पर जारी नए सर्कुलर में स्पष्ट किया कि इस टेस्ट के स्कोर के आधार पर विद्यार्थी को पसंद का विषय चुनने की सलाह दी जाएगी. यह टेस्ट देने के लिए वह बाध्य नहीं होगा.

शिक्षकों के अनुसार, अब तक देश के सीबीएसई स्कूलों में बच्चों के एप्टीट्यूट को परखने का कोई प्रावधान होने से अधिकांश विद्यार्थी सांइस मैथ्स और साइंस बायोलॉजी विषय लेकर मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की महंगी कोचिंग ले रहे थे. जिसमें 2-3 वर्षों में भी चयन न होने पर वह मानसिक अवसाद से ग्रसित हो रहे थे. जबकि कक्षा-10वीं में ही ऐसे एप्टीट्यूड टेस्ट से उनकी क्षमता को परख लेंगे तो अन्य क्षेत्रों में वे स्किल और रूचि के साथ उंचाइयों को छू सकते हैं.

 टेस्ट का ब्यौरा 29 जनवरी को :

इस महीने 29 जनवरी को सीबीएसई वेबसाइट पर ‘के वाय ए‘ का ब्यौरा जारी कर दिया जाएगा. इस ब्यौरे में टेस्ट बुकलेट, टेक्निकल मैन्युअल, शिक्षकों के लिए टीचर्स मैन्युअल एवं आंसर शीट के डॉक्यूमेंट होंगे. सभी सीबीएसई स्कूलों में इस कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट का आयोजन घोषित कार्यक्रम के अनुसार होगा. आंसर शीट के जांचने के पश्चात विद्यार्थी के अंको की जानकारी स्कूल सीबीएसई वेबसाइट अपलोड करेंगे.

 जिला प्रशासन भी स्क्रीनिंग टेस्ट के पक्ष में

‘के वाय ए’ टेस्ट के आधार पर विद्यार्थियों को जेईई-मेन और जेईई-एडवांस्ड की कोचिंग के लिए कोटा के कोचिंग संस्थानों में एडमिशन से पहले सही काउंसलिंग करने में सुविधा होगी. विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को यह पता चल सकेगा कि वह एप्टिट्यूड टेस्ट के आधार पर ऐसी प्रवेश परीक्षाओं के योग्य है अथवा नहीं. इससे बच्चों को अनावश्यक मानसिक दबाव से छुटकारा मिलेगा. पेरेंट्स बच्चों पर अपनी महत्वाकांक्षाएं नहीं थोप सकेंगे.

कोटा जिला प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकों में गाइडलाइन को लागू करने और स्क्रीनिंग टेस्ट के आधार पर विद्यार्थियों को प्रवेश देने के निर्देश दिए थे. अब सीबीएसई द्वारा स्कूलों में एप्टीटयूट टेस्ट प्रारंभ करने से विद्यार्थियों को अपनी योग्यता का पूर्वानुमान लग सकेगा, जिससे उनके अभिभावक कोचिंग के अनावश्यक महंगे खर्च से बच सकेंगे. इस नवाचार से भविष्य में कोटा में कोचिंग विद्यार्थियों की ओर से जा रही सुसाइड की घटनाएं भी थमेगी.