नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के पोर्ट शहर Tianjin का दौरा करेंगे। वे यहां शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और संभावना जताई जा रही है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी एक बैठक में हिस्सा लेंगे। यह पीएम मोदी की चीन की पहली यात्रा के बीच प्रयास के हो रहे हैं, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है, जो जून 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद तीनों स्थिति में पहुंच गए।
Galwan Valley का इतिहास
2020 में Galwan Valley standoff भारत और चीन के बीच पिछले 40 वर्षों का सबसे गंभीर सीमा संघर्ष था। इसमें दोनों देशों के सैनिकों की मौत हुई थी। इस घटना ने संबंधों में तीव्र तनाव पैदा किया और bilateral ties को सबसे निचले स्तर तक ले गया।
PM Modi ने Chinese Foreign Minister Wang Yi से मुलाकात की
इस दौरे से पहले पीएम मोदी ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से नई दिल्ली में मुलाकात की। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों को मजबूत करने में लगातार प्रगति कर रहे हैं। पीएम मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि पिछले वर्ष कज़ान में राष्ट्रपति शी के साथ मेरी बैठक के बाद, भारत-चीन में एक-दूसरे के हितों और राष्ट्रों के सम्मान के साथ निरंतर प्रगति हुई है। मैं शंघाई सहयोग शिखर सम्मेलन के दौरान तियानजिन में होने वाली हमारी अगली बैठक की प्रतीक्षा कर रहा हूं। उनकी यह यात्रा उसी समय हो रही है जब भारत-अमेरिका व्यापार दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका ने भारतीय आयात पर ऊंचे टैरिफ लागू किये हैं, रूसी तेल की खरीद को लेकर।
Modi-Xi Interactions और India-China Relations
इस दौरे का मुख्य आकर्षण PM Modi और President Xi Jinping की संभावित बैठक होगी। यदि यह बैठक होती है, तो यह दोनों नेताओं की Galwan Valley (2020) के बाद की सबसे महत्वपूर्ण interaction होगी। Galwan के बाद, Modi और Xi ने कोई full-fledged bilateral summit नहीं किया, लेकिन global forums में दोनों की मुलाकात हुई। नवंबर 2022 में G20 Bali Summit में पहली बार public handshake हुई। अक्टूबर 2024 में BRICS Summit, Kazan में पहली बार formal talks हुईं, जिसने ties stabilization की दिशा में कदम बढ़ाए। भारत ने हमेशा कहा है कि “border peace के बिना normalcy in ties नहीं लौट सकती।” चीन ने भी सहयोग करने और bilateral relations सुधारने की इच्छा जताई है।
Border Issues और Military Talks
भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की 21+ दौर की वार्ता हुई। यह उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता एलएसी पर तनाव कम करने के लिए आयोजित की गई। सेना पैंगोंग झील, गलवान और गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स से पीछे हट गई है। देपसांग मैदान और डेमचोक में असहमति अभी भी है। डेमचोक और डेपसांग में सेनाएं पूरी तरह से वापस हटा ली गई हैं।
आर्थिक, व्यापार और लोगों के बीच संबंध
इस साल India और China ने ties rebuild करने और people-to-people exchanges बढ़ाने पर चर्चा की। Kailash Manasarovar Yatra फिर से शुरू की गई। Tourist visas के issuance को resume किया गया। Fertilizers, rare earth minerals, और tunnel boring machines के export पर restrictions हटाने पर agreement हुआ। India-China direct flights और visa facilitation पर ongoing negotiations जारी हैं।
India-China Relations की Trajectory
भारत-चीन संबंधों का trajectory पिछले दशकों में बदलता रहा है – post-colonial brotherhood से लेकर strategic rivalry तक। Economic ties मजबूत हुए और bilateral trade बढ़ा, लेकिन Galwan clash ने इस संतुलन को बाधित किया।हाल के महीनों में cautious engagement के संकेत मिले हैं। BRICS Summit (2024) में Modi-Xi की बैठक ने slow normalisation की राह खोली। SCO Summit, Tianjin में दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात global observers के लिए महत्वपूर्ण है।
Regional और Global Context
US-China rivalry और Donald Trump के India पर trade pressure के बीच India की SCO Summit में भागीदारी अधिक strategic महत्व रखती है। भारत अपने regional power के रूप में स्थिति मजबूत करने और China के साथ dialogue channels खुले रखने का अवसर पा रहा है। Economic Stats: 2024 में China, India का दूसरा सबसे बड़ा trading partner था। Bilateral trade $118 billion तक पहुंचा।