नई दिल्ली. केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ को राष्ट्रपति के सीधे नियंत्रण में लाने के फैसले पर पंजाब में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। इसी बीच पंजाब BJP प्रमुख सुनील जाखड़ ने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब का अभिन्न हिस्सा है और केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
चंडीगढ़ पंजाब का हिस्सा, भ्रम जल्द होगा दूर: सुनील जाखड़
सुनील जाखड़ ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर पोस्ट किया “चंडीगढ़ पंजाब का अभिन्न हिस्सा है। चाहे चंडीगढ़ का मुद्दा हो या पंजाब के पानी का, पंजाब BJP हमेशा राज्य के हित में खड़ी है। जो भी भ्रम पैदा हुआ है, वह केंद्र से बात कर दूर कर दिया जाएगा। मैं खुद एक पंजाबी हूं और हमारे लिए पंजाब हमेशा पहले आता है।”
केंद्र का कदम: चंडीगढ़ को Article 240 के दायरे में लाने का प्रस्ताव
केंद्र सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 के तहत लाया जाए, जिससे राष्ट्रपति को सीधे तौर पर कानून और नियम बनाने का अधिकार मिलेगा। इससे चंडीगढ़ में स्वतंत्र प्रशासक (Independent Administrator) नियुक्त करने का रास्ता साफ हो सकता है।
इसके लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2025
1 दिसंबर 2025 से शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा।
यह संशोधन चंडीगढ़ को उन केंद्र शासित प्रदेशों की श्रेणी में रखेगा जिनके पास अपनी विधानसभा नहीं है—
जैसे अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव, और पुडुचेरी (जब उसकी विधानसभा निलंबित हो)।
AAP, कांग्रेस और अकाली दल का घोर विरोध
AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल बोले—यह पंजाब की पहचान पर हमला
केजरीवाल ने केंद्र के इस कदम को “पंजाब की पहचान और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला” बताया।
उन्होंने कहा—
“फेडरल स्ट्रक्चर को कमजोर करने की यह मानसिकता बेहद खतरनाक है।”
अकाली दल की हर्षिमरत कौर बादल: पंजाब के अधिकार छीनने का प्रयास
हर्षिमरत कौर बादल ने कहा—
“इस संशोधन से चंडीगढ़ को अलग राज्य बना दिया जाएगा और पंजाब पूरी तरह से अपने अधिकार खो देगा।”
उनके मुताबिक यह कदम फेडरल स्ट्रक्चर के खिलाफ है और SAD इसे सदन में कड़ा विरोध करेगी।
कांग्रेस MLA परगट सिंह: चंडीगढ़ को पूरी तरह छीनने की कोशिश
परगट सिंह ने केंद्र के कदम को “अग्रेसन का एक्ट” बताते हुए पंजाब के लिए अस्वीकार्य कहा। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि विधानसभा में प्रस्ताव पास किया जाए
सभी दलों की बैठक बुलाई जाए
संसद सत्र से पहले दिल्ली में प्रदर्शन किया जाए
राष्ट्रपति से मिलने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजा जाए
चंडीगढ़ प्रशासन का इतिहास: कब-कब हुआ बदलाव
1966: पंजाब पुनर्गठन के बाद चंडीगढ़ को स्वतंत्र मुख्य सचिव द्वारा संचालित किया गया।
1 जून 1984: प्रशासन पंजाब के राज्यपाल को सौंपा गया; मुख्य सचिव को एडवाइजर बना दिया गया।
2016: केंद्र ने KJ अल्फोंस को स्वतंत्र प्रशासक बनाने का प्रयास किया, पर विरोध के बाद फैसला वापस हुआ।
पंजाब लंबे समय से यह मांग उठाता रहा है कि चंडीगढ़ को तुरंत पंजाब को सौंपा जाए। हाल ही की नॉर्दर्न जोनल काउंसिल मीटिंग में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह मुद्दा फिर उठाया।
