नई दिल्ली. हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों में देरी को लेकर बढ़ते विपक्षी दबाव के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि चुनाव तभी कराए जाएंगे जब राज्य में लागू Disaster Management Act वापस ले लिया जाएगा।
“चुनाव स्थगित किए हैं, टाले नहीं” — मुख्यमंत्री
शीतकालीन विधानसभा सत्र के दूसरे दिन सीएम सुक्खू ने विपक्ष द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा:
“हमने पंचायत चुनावों को सिर्फ पोस्टपोन किया है, डिफर नहीं किया। आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू होने के कारण यह निर्णय लिया गया है।” उन्होंने बताया कि जून 2025 से पंचायतों के पुनर्गठन और सीमांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी और इसमें सरकार ने चुनाव आयोग के काम में हस्तक्षेप नहीं किया।
विपक्ष का आरोप: सरकार चुनाव से डर रही है
भाजपा विधायकों ने पंचायत चुनावों में देरी पर सरकार की आलोचना तेज कर दी। भाजपा विधायक रंधीर शर्मा ने इस मुद्दे पर नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव दिया था, जिसे सदन के स्पीकर ने स्वीकार कर चर्चा की अनुमति दी। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सरकार चुनावों से भाग रही है और देरी का बहाना बना रही है।
आपदा और प्रशासनिक स्थिति पर सरकार का तर्क
सीएम सुक्खू ने कहा कि 2025 की प्राकृतिक आपदा पहले से भी ज्यादा गंभीर रही। जिले के उपायुक्त राहत, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन में लगे थे, इसलिए उन्हें चुनावी प्रक्रिया में नहीं लगाया जा सकता था।
उन्होंने कहा कि जैसे ही आपदा अधिनियम हटेगा और प्रभावित परिवारों का पुनर्वास पूरा होगा, पंचायत चुनाव तुरंत करवाए जाएंगे।
पंचायत अवसंरचना को भारी नुकसान
पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने सदन को बताया कि विभाग की 631 इमारतें चुनाव कराने योग्य नहीं हैं,पंचायती राज विभाग को ₹196 करोड़ का नुकसान हुआ है
उन्होंने कहा कि किसी ने यह नहीं कहा कि चुनाव टाले गए हैं। अभी चुनाव के समय में पर्याप्त गुंजाइश है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
बीजेपी विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने सरकार को जवाब देते हुए कहा कि अगर सड़कें और पेयजल योजनाएं अभी तक बहाल नहीं हुईं तो सरकार और मंत्री क्या कर रहे हैं? चुनावों में देरी सरकार की असफलता स्वीकार करने जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चुनावों से डर रही है क्योंकि उसके पास जनता को दिखाने लायक कोई उपलब्धि नहीं है।”
चुनाव कब तक संभव?
हिमाचल में 3,500 से अधिक ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को पूरा हो रहा है।
चुनाव दिसंबर 2025 – जनवरी 2026 के बीच निर्धारित हैं।
सरकार ने अक्टूबर 2025 में चुनाव आयोग से स्थिति सुधरने तक चुनाव स्थगित रखने को कहा था।
मुख्य बातें
| मुद्दा | स्थिति |
|---|---|
| पंचायत चुनाव स्थिति | आपदा प्रबंधन अधिनियम हटने के बाद |
| विवाद | भाजपा ने लगाया चुनाव टालने का आरोप |
| नुकसान | ₹196 करोड़ और 631 भवन क्षतिग्रस्त |
| सरकार का तर्क | प्रशासन आपदा प्रबंधन में व्यस्त |
| चुनाव की समयसीमा | दिसंबर 2025 – जनवरी 2026 |
