नई दिल्ली. Chief Justice of India (CJI) Surya Kant ने सुप्रीम कोर्ट की Artificial Intelligence Committee का पुनर्गठन कर दिया है। नई कमेटी का उद्देश्य उच्च न्यायपालिका से लेकर निचली अदालतों तक AI टूल्स के अडॉप्शन, डेवलपमेंट और डिप्लॉयमेंट को दिशा देना है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी गई।
नई AI कमेटी में कौन-कौन शामिल?
पुनर्गठित पैनल का नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा करेंगे।
कमेटी के अन्य सदस्य:
जस्टिस संजीव सचदेवा, चीफ जस्टिस, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट
जस्टिस राजा विजयाराघवन वी, केरल हाई कोर्ट
जस्टिस अनुप चित्रा, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट
जस्टिस सूरज गोविंदराज, कर्नाटक हाई कोर्ट
इसके अलावा,
अनुपम पत्र (OSD – Technology) को मेंबर-सेक्रेटरी और कन्कीनर बनाया गया है।
आशीष जे. शिरढोंकर, eCommittee सदस्य (Systems), को स्पेशल इन्वाइटी के रूप में शामिल किया गया है।
कमेटी का मुख्य उद्देश्य
CJI ने कमेटी को निर्देश दिया है कि वह आगे भी:
AI टूल्स को अपनाने
नई AI तकनीकों के विकास
और न्यायपालिका में उनके सुरक्षित उपयोग
पर निगरानी और मार्गदर्शन प्रदान करे।
इसका व्यापक लक्ष्य है—न्याय प्रणाली में दक्षता, पारदर्शिता और सुलभता को बढ़ाना।
सरकार ने संसद में क्या कहा था?
पुनर्गठन ऐसे समय में किया गया है जब हाल ही में केंद्र सरकार ने लोकसभा को बताया कि: सुप्रीम कोर्ट ने AI कमेटी तो बनाई है,लेकिन अभी तक AI उपयोग पर कोई औपचारिक नीति या गाइडलाइन जारी नहीं की गई है, क्योंकि AI टूल्स अभी पायलट फेज में काम कर रहे हैं। केंद्रीय विधि राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्यायपालिका AI को लेकर सतर्क है। उन्होंने कई चिंताएं भी सूचीबद्ध कीं:
एल्गोरिदमिक बायस
भाषा और अनुवाद संबंधी सीमाएं
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता
AI आउटपुट की मैनुअल वेरिफिकेशन की ज़रूरत
अब तक कौन-कौन से AI टूल्स विकसित हुए हैं?
मेघवाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की eCommittee ने सीमित उपयोग वाले कई AI टूल्स विकसित किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
Legal Research Analysis Assistant (LegRAA) – कानूनी शोध में सहायता
Digital Courts 2.1 –
ASR-SHRUTI (Voice-to-Text)
PANINI (Translation System)
ये टूल्स जजों की रिसर्च, डॉक्यूमेंटेशन और केस मैनेजमेंट में मदद करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पायलट चरण में अभी तक कोई सिस्टमेटिक बायस या अनइंटेंडेड कंटेंट सामने नहीं आया है।
कोर्ट में बढ़ रही है डिजिटल फर्जीवाड़े की चुनौती
मंत्री ने चेतावनी दी कि अदालतों के सामने फर्जी और मॉर्फ्ड डिजिटल कंटेंट पेश किए जाने के मामले बढ़ रहे हैं।
ऐसे अपराधों पर कार्रवाई:
IT Act 2000
Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
के प्रावधानों के तहत की जाती है।
