नई दिल्ली: राज्यसभा की मनोनीत सांसद सुधा मूर्ति ने शुक्रवार को 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य देखभाल व शिक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते हुए एक निजी सदस्य प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने सरकार से इस संबंध में संविधान संशोधन कर नया अनुच्छेद 21B जोड़ने पर विचार करने का आग्रह किया।
प्रस्ताव रखते हुए सुधा मूर्ति ने कहा, “बच्चे हमारा भविष्य हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा जीवनभर उन्हें लाभ पहुंचाती है। इसलिए संविधान में शिक्षा के मौलिक अधिकार को 6–14 वर्ष से बढ़ाकर 3–14 वर्ष किया जाना चाहिए।” गौरतलब है कि अनुच्छेद 21A के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है, जबकि 86वां संविधान संशोधन (2002) राज्य को 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक देखभाल और शिक्षा को बढ़ावा देने का निर्देश देता है।
NEP 2020 का हवाला
सुधा मूर्ति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि नीति 2030 तक सार्वभौमिक, गुणवत्तापूर्ण Early Childhood Care and Education (ECCE) की सिफारिश करती है। उन्होंने बताया कि 3 से 8 वर्ष की आयु के बीच बच्चों के संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक विकास की नींव मजबूत होती है और 6 वर्ष की आयु तक मस्तिष्क का करीब 85% विकास हो जाता है।
उन्होंने आंगनवाड़ी सेवाओं को मजबूत करने या सरकार द्वारा उपयुक्त अन्य तंत्र अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि सभी बच्चों को समग्र और समान प्रारंभिक समर्थन मिल सके। साथ ही ECCE से जुड़े डिलीवरी सिस्टम, प्रशिक्षण और सपोर्ट को बेहतर करने की मांग भी की।
सदन में सदस्यों के विचार
मेधा विश्राम कुलकर्णी (भाजपा) ने शहरी क्षेत्रों में आंगनवाड़ी किराये के लिए मिल रहे ₹3,000 अनुदान को अपर्याप्त बताया।
पी. विल्सन (DMK) ने कहा कि अनिवार्य शिक्षा को चरणबद्ध तरीके से कक्षा 12 तक बढ़ाया जाना चाहिए।
स्वाति मालीवाल (AAP) ने NFHS का हवाला देते हुए कहा कि आंगनवाड़ी में नामांकित करीब 49% बच्चे प्री-स्कूल सेवाओं में शामिल नहीं हो रहे, जिससे निजी प्ले-स्कूल का बाजार ₹25,000 करोड़ से अधिक का हो गया है।
सस्मित पात्रा (BJD) ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए बच्चों को “हमारे लोकतंत्र के मूक नागरिक” बताया और आंगनवाड़ी तंत्र को सशक्त करने की अपील की।
जॉन ब्रिटास (CPI-M) ने आंगनवाड़ी कर्मियों के लिए प्रोत्साहन और वेतन वृद्धि की मांग की।
जावेद अली खान (सपा) ने उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी कर्मियों की दयनीय स्थिति की ओर ध्यान दिलाया।
जेबी माथेर हिशाम (कांग्रेस) ने प्रारंभिक शिक्षा में राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया।
फौजिया खान (NCP-SCP) ने प्री-प्राइमरी शिक्षा के लिए एक समान बोर्ड बनाने की जरूरत बताई।
मयंककुमार नायक (भाजपा) ने आंगनवाड़ियों के आधुनिकीकरण और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला व बाल विकास पर फोकस को रेखांकित किया।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान व्यापक सहमति उभरी कि प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को मजबूत करना देश के भविष्य के लिए अनिवार्य है। सुधा मूर्ति का प्रस्ताव 3–6 वर्ष के बच्चों को शिक्षा के मौलिक अधिकार के दायरे में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
