नई दिल्ली. साल 2026 की शुरुआत के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के सामने कई ऐसे मामले हैं, जिनका असर देश की राजनीति, लोकतंत्र, धार्मिक स्वतंत्रता और डिजिटल कारोबार पर पड़ सकता है। ये केस न सिर्फ कानून की दिशा तय करेंगे, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों को भी प्रभावित करेंगे।
आइए जानते हैं 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुने जाने वाले 5 सबसे महत्वपूर्ण मामलों के बारे में आसान भाषा में—
- Online Gaming Act, 2025 को लेकर संवैधानिक चुनौती
केस का नाम:
Head Digital Works Pvt Ltd बनाम भारत संघ व अन्य
कानूनी मुद्दा:
इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि क्या संसद को रियल मनी ऑनलाइन गेम्स पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का अधिकार है, खासकर उन खेलों पर जिन्हें अदालतें पहले ही “Game of Skill” (जैसे रमी और पोकर) मान चुकी हैं।
याचिकाकर्ताओं ने Online Gaming Act, 2025 की धारा 14, 15 और 16 को चुनौती देते हुए कहा है कि स्किल-बेस्ड गेम्स को जुए के बराबर मानना Article 19(1)(g) के तहत व्यापार और पेशा चुनने के मौलिक अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
पृष्ठभूमि:
Head Digital Works Pvt Ltd ने यह याचिका 2025 में बनाए गए उस कानून के खिलाफ दायर की है, जिसे ऑनलाइन गेमिंग की लत और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के उद्देश्य से लाया गया था। सरकार इसे सामाजिक कल्याण का कदम बता रही है, जबकि गेमिंग इंडस्ट्री का कहना है कि यह कानून “Game of Skill” और “Game of Chance” के बीच अंतर नहीं करता, जिससे अरबों डॉलर के उद्योग पर खतरा मंडरा रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने अंतिम फैसले तक केंद्र सरकार की सख्त कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।
मौजूदा स्थिति:
मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अभी सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन 2026 में इस पर सुनवाई होने की संभावना है।
- Anti-Conversion Laws को चुनौती
केस का नाम:
Citizens for Justice and Peace बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य
कानूनी मुद्दा:
यह याचिकाओं का समूह उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और हरियाणा जैसे राज्यों में लागू Anti-Conversion Laws की संवैधानिक वैधता को चुनौती देता है।
मुख्य सवाल यह है कि क्या ये कानून Article 25 (धर्म की स्वतंत्रता) और निजता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं।
पृष्ठभूमि:
यह मुकदमा NGO Citizens for Justice and Peace (CJP) और अन्य संगठनों द्वारा दायर किया गया है। राज्यों के इन कानूनों में धर्म परिवर्तन से पहले सरकारी अनुमति और जबरन या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन के आरोप में कड़ी सजा का प्रावधान है।
गुजरात और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहले ही कुछ प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगा चुके हैं, जिन्हें व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ माना गया था। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन कानूनों का इस्तेमाल अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
मौजूदा स्थिति:
सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं को जनवरी 2026 में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। कोर्ट पहले ही इस मुद्दे की गंभीरता और सामाजिक तनाव की आशंका को स्वीकार कर चुका है।
- Election Commissioners Appointment Act, 2023 को चुनौती
केस का नाम:
डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत संघ / Association for Democratic Reforms बनाम भारत संघ
कानूनी मुद्दा:
याचिकाकर्ताओं ने Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023 की संवैधानिकता को चुनौती दी है। दलील है कि चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाने से Article 324 के तहत चुनाव आयोग की स्वतंत्रता कमजोर होती है। यह सुप्रीम कोर्ट के Anoop Baranwal बनाम भारत संघ (2023) के फैसले के भी खिलाफ है।
पृष्ठभूमि:
2023 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति में प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और CJI शामिल हों। इसके बाद संसद ने नया कानून बनाकर CJI की जगह एक केंद्रीय मंत्री को समिति में शामिल कर दिया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कार्यपालिका का बहुमत (2:1) चुनाव आयोग की निष्पक्षता को प्रभावित करता है।
मौजूदा स्थिति:
यह मामला जनवरी 2026 में सुनवाई के लिए तय है। कोर्ट से सत्ता के विभाजन और संस्थागत स्वतंत्रता पर अहम टिप्पणी की उम्मीद है।
- Electoral Rolls के Special Intensive Revision (SIR) के खिलाफ याचिका
कानूनी मुद्दा:
यह याचिका Article 326 (सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार) के तहत दाखिल की गई है। आरोप है कि Special Intensive Revision (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम मनमाने तरीके से हटाए गए, जिससे लोगों का मतदान अधिकार छीना गया।
पृष्ठभूमि:
शुरुआत में यह मामला बिहार से जुड़ा था, लेकिन बाद में इसका दायरा अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ गया। याचिकाकर्ताओं को आशंका है कि वोटर लिस्ट से पक्षपातपूर्ण तरीके से नाम हटाकर चुनावी नतीजों को प्रभावित किया जा सकता है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार किया था, लेकिन इसकी संवैधानिक वैधता की जांच पर सहमति दी थी।
मौजूदा स्थिति:
जनवरी 2026 में सुनवाई होगी। कोर्ट को साफ मतदाता सूची और वोट देने के मौलिक अधिकार के बीच संतुलन बनाना होगा।
- Waqf Amendment Act, 2025
केस का नाम:
In Re: Waqf Amendment Act, 2025 Challenges
कानूनी मुद्दा:
करीब 65 याचिकाओं में Waqf Amendment Act, 2025 को चुनौती दी गई है। दलील है कि यह कानून Article 26 का उल्लंघन करता है, जो धार्मिक संस्थाओं को अपने मामलों के प्रबंधन का अधिकार देता है।
विवादित प्रावधानों में जिला कलेक्टर को अधिक अधिकार देना और वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना शामिल है।
पृष्ठभूमि:
सरकार ने वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता और सुधार के उद्देश्य से यह कानून लाया था। लेकिन मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप है और धार्मिक अधिकारों का हनन करता है।
मौजूदा स्थिति:
2026 की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ विवादित प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगा दी है। पूरे साल इस कानून की संवैधानिक वैधता पर विस्तृत सुनवाई होने की संभावना है।
ये पांचों मामले भारत के संविधान से जुड़े बेहद अहम सवालों को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखते हैं। इनके फैसले यह तय करेंगे कि सरकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धार्मिक आस्था, डिजिटल कारोबार और चुनावी प्रक्रिया में कितनी दखल दे सकती है।
2026 में आने वाले ये फैसले भारत की संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर लंबे समय तक असर डालेंगे।
