नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा उनके महाभियोग की जांच के लिए समिति नियुक्त करने के फैसले को चुनौती दी थी।
लोकसभा अध्यक्ष ने जांच समिति गठित की
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने यशवंत वर्मा के खिलाफ तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने की घोषणा की। समिति में न्यायमूर्ति अमित कुमार, न्यायमूर्ति मनींदर मोहन श्रीवास्तव और बी बी आचार्य शामिल हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ने 146 सांसदों के हस्ताक्षरित प्रस्ताव को स्वीकार किया, जिसमें न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की सिफारिश की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट का पिछला रुख
पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इन-हाउस जांच प्रक्रिया, जिसने न्यायाधीश यशवंत वर्मा को हटाने की सिफारिश की, कानूनी वैधता रखती है।
सुप्रीम कोर्ट ने यशवंत वर्मा द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने इन-हाउस जांच पैनल की रिपोर्ट और पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजय खन्ना की सिफारिश को चुनौती दी थी।
मामले का विवरण
यह विवाद उस समय सामने आया जब 14 मार्च को दिल्ली स्थित उनके आधिकारिक आवास में आग लगने के दौरान अघोषित नकदी जलाई हुई पाई गई। उस समय वह दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश थे और घर पर मौजूद नहीं थे।
सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को सुनवाई के दौरान यशवंत वर्मा से कई सवाल पूछे। कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से पूछा कि यदि उनका मुवक्किल इन-हाउस जांच पैनल को असंवैधानिक मानते थे, तो उन्होंने उसके सामने क्यों पेशी दी और अब जाकर उसे चुनौती क्यों दे रहे हैं।
