नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में कुल 21 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई सबरीमाला मंदिर से जुड़े सोने और अन्य मंदिर संपत्तियों की कथित हेराफेरी और गबन के मामले में की गई है।
क्या है मामला
ईडी की यह जांच केरल क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई है। प्रारंभिक जांच में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के कुछ अधिकारियों, निजी व्यक्तियों, बिचौलियों और आभूषण व्यापारियों की गहरी साजिश सामने आने के संकेत मिले हैं।
जांच में क्या खुलासा
वर्ष 2019 से 2025 के बीच मंदिर परिसर से स्वर्ण-मंडित (Gold-clad) पवित्र वस्तुओं को कथित तौर पर तांबे की प्लेट बताकर आधिकारिक रिकॉर्ड में गलत तरीके से दर्ज किया गया।
इन वस्तुओं को अवैध रूप से मंदिर से बाहर निकालकर चेन्नई और कर्नाटक की निजी इकाइयों में रासायनिक प्रक्रियाओं के जरिए सोना निकाला गया।
इससे प्राप्त धन को अपराध की आय (Proceeds of Crime) के रूप में रखा गया, स्थानांतरित किया गया और छिपाया गया।
छापेमारी का उद्देश्य
ईडी ने बताया कि तलाशी का मकसद—
अपराध से अर्जित धन का पता लगाना,
लाभार्थियों की पहचान करना,
आपत्तिजनक दस्तावेज़ और डिजिटल साक्ष्य जब्त करना,
और मनी लॉन्ड्रिंग के पूरे नेटवर्क की सीमा का आकलन करना है।
अन्य अनियमितताओं की भी जांच
जांच के दौरान सबरीमाला मंदिर से जुड़ी अन्य वित्तीय अनियमितताओं और घोटालों के संकेत भी मिले हैं। इनमें मंदिर की चढ़ावे (ऑफरिंग्स) और अनुष्ठानों से संबंधित धन के कथित दुरुपयोग के मामले शामिल हैं। इन पहलुओं की भी PMLA के दायरे में जांच की जा रही है।
आगे की कार्रवाई
ईडी के अनुसार, जब्त किए गए साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद अतिरिक्त तलाशी, पूछताछ और संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई की जा सकती है। मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।