नई दिल्ली: भारत के ग्रामीण प्रशासन और पंचायत वित्तीय प्रबंधन में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। देशभर की 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों ने अप्रैल 2019 से अब तक ₹3 लाख करोड़ से ज्यादा की राशि ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम के जरिए प्रोसेस की है। यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के eGramSwaraj प्लेटफॉर्म के माध्यम से हुई, जिसे पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) से जोड़ा गया है।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, इस डिजिटल व्यवस्था के तहत हर एक रुपये का भुगतान सीधे विक्रेताओं (vendors) और सेवा प्रदाताओं (service providers) को रियल टाइम में किया गया है और पूरी प्रक्रिया का पारदर्शी डिजिटल ऑडिट ट्रेल भी मौजूद है।
ग्रामीण फंडिंग में ‘कैश और कागज’ से ‘डिजिटल और पारदर्शी’ सिस्टम की ओर बदलाव
यह पहल e-Panchayat Mission Mode Project के तहत विकसित की गई है। इसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों के कामकाज को आधुनिक, जवाबदेह और तकनीक-आधारित बनाना है।
पहले गांव स्तर पर विकास कार्यों और पंचायत खर्च का बड़ा हिस्सा कागजी प्रक्रिया, मैन्युअल हिसाब-किताब और कई जगह नकद भुगतान पर आधारित था। इससे फंड के उपयोग, निगरानी और जवाबदेही में कई तरह की समस्याएं आती थीं।
अब eGramSwaraj और PFMS के एकीकरण के बाद ग्राम पंचायतें
अपनी विकास योजनाएं ऑनलाइन अपलोड कर रही हैं
खर्च का डिजिटल रिकॉर्ड रख रही हैं
और भुगतान सीधे ऑनलाइन कर रही हैं
इससे पूरी व्यवस्था तेज, पारदर्शी, जवाबदेह और धोखाधड़ी-रोधी बनती जा रही है।
FY 2025-26 में ही ₹53,342 करोड़ का ऑनलाइन ट्रांसफर
पेट्रोलियम या शहरी प्रशासन की तरह अब ग्रामीण वित्तीय शासन में भी तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
वित्त वर्ष 2025-26 में ही पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) ने eGramSwaraj-PFMS इंटरफेस के जरिए ₹53,342 करोड़ का ट्रांसफर किया।
इसी अवधि में: 2,55,254 ग्राम पंचायतों ने अपनी विकास योजनाएं पोर्टल पर अपलोड कीं अब तक कुल 1,60,79,737 विक्रेता (vendors) सिस्टम पर रजिस्टर्ड हो चुके हैं।
यह आंकड़े बताते हैं कि गांवों में डिजिटल वित्तीय प्रबंधन अब केवल एक योजना नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बन चुका है।
किस तरह काम करता है eGramSwaraj-PFMS सिस्टम?
यह पंचायती राज मंत्रालय का डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे ग्राम पंचायतों के योजना निर्माण, लेखांकन, मॉनिटरिंग और भुगतान के लिए तैयार किया गया है।
PFMS क्या है?
Public Financial Management System (PFMS) सरकार का एक वेब-आधारित ऑनलाइन ट्रांजैक्शन सिस्टम है, जिसका इस्तेमाल फंड मैनेजमेंट और ई-पेमेंट के लिए किया जाता है।
जब ये दोनों प्लेटफॉर्म एक साथ काम करते हैं, तो पंचायतों द्वारा किए जाने वाले भुगतान सीधे और ट्रैक किए जा सकने वाले बन जाते हैं।
क्यों अहम है यह बदलाव?
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्राम पंचायतें केंद्र और राज्य सरकारों की कई योजनाओं के तहत बड़ी मात्रा में धनराशि प्राप्त करती हैं। इसके अलावा उनके पास स्थानीय राजस्व (own source revenue) भी होता है।
पिछले कई वर्षों में CAG (कैग) ने पंचायत फंड के इस्तेमाल को लेकर कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं, जैसे:
फंड का गलत उपयोग (misappropriation)
राशि का अन्यत्र मोड़ना (diversion of funds)
अनुदान के उपयोग में देरी (tardy utilisation)
रिकॉर्ड और भुगतान में अनियमितताएं
सरकार का मानना है कि डिजिटल सिस्टम के जरिए इन समस्याओं पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।
15वें वित्त आयोग के तहत पंचायतों को मिला बड़ा फंड
पंचायती राज मंत्रालय के मुताबिक, 15वें वित्त आयोग (15th Finance Commission) के तहत FY 2021-26 के लिए पंचायतों, तीन-स्तरीय स्थानीय निकायों, पारंपरिक स्थानीय निकायों और छठी अनुसूची क्षेत्रों के लिए ₹2,36,805 करोड़ आवंटित किए गए।
यह राशि 28 राज्यों, जिनमें केरल भी शामिल है, को कवर करती है।
वहीं, 14वें वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों के लिए ₹2,00,292.20 करोड़ आवंटित किए गए थे।
इसमें से:
₹1,83,248.54 करोड़ जारी किए जा चुके हैं
जिनमें ₹3,774.20 करोड़ केरल को दिए गए
इन बड़े आवंटनों को देखते हुए पारदर्शी और जवाबदेह खर्च प्रणाली की जरूरत और भी बढ़ जाती है।
सरकार ने क्या कहा?
पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज ने इस उपलब्धि को ग्राम पंचायतों के डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया। उनके अनुसार, यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि देश की 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों ने तकनीक पर भरोसा जताया है और अब डिजिटल सिस्टम पंचायत स्तर के वित्तीय प्रशासन की रीढ़ बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मंत्रालय के उस निरंतर प्रयास का परिणाम है, जिसके तहत हर पंचायत को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में काम किया गया।
गांवों में डिजिटल गवर्नेंस की नई तस्वीर
यह उपलब्धि केवल भुगतान के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांवों में प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन की नई तस्वीर भी पेश करती है।
इससे:
गांवों के विकास कार्यों की निगरानी आसान होगी
फर्जी बिलिंग और अनियमित भुगतान पर रोक लगेगी
वेंडर्स को समय पर भुगतान मिलेगा
और पंचायत स्तर पर विश्वास और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगे
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर eGramSwaraj-PFMS मॉडल को और मजबूत किया गया, तो यह ग्रामीण भारत में डिजिटल गवर्नेंस का सबसे सफल मॉडल बन सकता है।
आने वाले समय में यदि इसे ऑडिट, प्रोजेक्ट ट्रैकिंग, भू-स्थानिक निगरानी (geo-tagging) और सार्वजनिक डैशबोर्ड से और जोड़ा जाए, तो पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अपारदर्शिता को और कम किया जा सकता है।
