नई दिल्ली: महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर आगे बढ़ने का संकेत दिया है। शुक्रवार को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों का देश की चुनावी व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है, इसलिए इस विषय पर सामूहिक रणनीति तैयार करना जरूरी है।
खड़गे ने स्पष्ट किया कि जब वर्ष 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ था, तब कांग्रेस ने इसके तत्काल लागू करने की मांग की थी। लेकिन केंद्र सरकार इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू करना चाहती थी। उन्होंने कहा, “महिलाओं और वंचित वर्गों के कल्याण जैसे मुद्दों पर हमें किसी से प्रमाण की जरूरत नहीं है।”
CWC बैठक में कई दिग्गज नेता शामिल
इस अहम बैठक में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इनमें कर्नाटक के मुख्यमंत्री Siddaramaiah, Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi Vadra, तेलंगाना के मुख्यमंत्री Revanth Reddy और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu समेत कई अन्य नेता शामिल हुए।
संसद के विशेष सत्र से पहले हलचल तेज
महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के लिए 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र से पहले कांग्रेस ने यह बैठक बुलाई। इस सत्र में सरकार संशोधित महिला आरक्षण विधेयक पेश करने की तैयारी में है।
क्या हैं प्रस्तावित बदलाव?
सरकार द्वारा लाए जाने वाले संशोधनों के तहत 2023 के “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” को नया स्वरूप दिया जा सकता है। पहले यह कानून नई जनगणना और परिसीमन से जुड़ा था, लेकिन अब 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन करने की योजना है।
लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 816 करने का प्रस्ताव
इनमें से लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी
अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) आरक्षण जारी रहेगा
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग से कोई प्रावधान नहीं
राज्यों की भूमिका सीमित, संसद द्वारा पारित कानून सीधे लागू होगा
इसके अलावा, एक अलग परिसीमन विधेयक भी संसद में लाया जाएगा, ताकि सीटों के पुनर्वितरण को कानूनी रूप दिया जा सके।
कांग्रेस का आरोप: “राजनीतिक यू-टर्न”
कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि यह कदम चुनावी राज्यों में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए उठाया गया “राजनीतिक यू-टर्न” है।
वहीं, प्रधानमंत्री Narendra Modi ने विपक्ष से अपील की है कि इस मुद्दे पर राजनीति न की जाए और सभी दल मिलकर महिलाओं के पक्ष में सर्वसम्मति से फैसला लें।
आगे क्या?
अब नजरें संसद के विशेष सत्र पर टिकी हैं, जहां इस महत्वपूर्ण संशोधन पर चर्चा और संभावित पारित होने की उम्मीद है। महिला आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से लंबित रहा है, और इस बार इसके नए स्वरूप में लागू होने की संभावना ने राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है।
