नई दिल्ली. लोकसभा में आज महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयकों—संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026—पर चर्चा फिर शुरू हुई। इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। इन पर आज ही मतदान होने की संभावना है।
सभी दल सहमत
बहस के दौरान के. कनिमोझी ने इन विधेयकों का विरोध करते हुए कहा कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को अचानक अधिसूचित करना चौंकाने वाला है। वहीं शशि थरूर ने कहा कि देश एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां महिला आरक्षण को लेकर लगभग सभी दलों में सहमति बन चुकी है।
पी.वी. मिधुन रेड्डी ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण की पक्षधर रही है। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के विजन को पूरा करने के लिए ये विधेयक लाए गए हैं।
अमित शाह पहले ही इस पर स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं
वहीं कल्याण बनर्जी ने विधानसभा चुनाव के दौरान संसद का विशेष सत्र बुलाने पर सवाल उठाते हुए इसे अनुचित बताया। लावु श्री कृष्ण देवरायलु ने विधेयकों का समर्थन करते हुए कहा कि गृह मंत्री अमित शाह पहले ही इस पर स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं।
समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव ने कहा कि महिलाओं को न्याय देना है तो सरकार को बालिकाओं की शिक्षा पर अधिक ध्यान देना चाहिए। वहीं हरसिमरत कौर बादल ने मांग की कि महिला आरक्षण को परिसीमन के बिना वर्तमान संरचना में ही लागू किया जाए।
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इसे देश में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक अवसर बताया। फिलहाल, सदन में इस मुद्दे पर चर्चा जारी है और सभी की नजरें आज होने वाले मतदान पर टिकी हैं।
