नई दिल्ली. भारत का एविएशन सेक्टर वित्त वर्ष 2026 (FY2026) में भी दबाव में रहने वाला है। रेटिंग एजेंसीईंधन संकट से हिला एविएशन सेक्टर, FY2026 में ₹180 अरब तक घाटे का खतराकी रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती ईंधन कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के चलते एयरलाइंस का कुल नुकसान ₹170–180 अरब तक पहुंच सकता है।
ईंधन महंगा, लागत बढ़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) महंगा हो गया है।
अप्रैल 2026 में ATF की कीमतें 9.2% बढ़ीं
सालाना आधार पर 18.2% की बढ़ोतरी
एयरलाइंस की कुल लागत में 30–40% हिस्सा ईंधन का होता है
इससे एयरलाइंस की मुनाफे की संभावनाओं पर सीधा असर पड़ा है।
भू-राजनीतिक असर और रुपये पर दबाव
पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने न सिर्फ तेल बल्कि भारतीय रुपये को भी प्रभावित किया है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से एयरलाइंस की लागत और बढ़ गई है, क्योंकि विमान लीज़, मेंटेनेंस जैसे खर्च डॉलर में होते हैं।
मांग में सुस्ती
घरेलू हवाई यात्रा की मांग भी कमजोर दिखी:
मार्च 2026 में यात्री वृद्धि केवल 1% रही
पूरे FY2026 में वृद्धि 1.4%
हालांकि FY2027 में 6–8% ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन महंगे टिकट (5–6% फ्यूल सरचार्ज) मांग को प्रभावित कर सकते हैं।
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परेशनल चुनौतियां
इंजन खराबी (खासतौर पर Pratt & Whitney) के कारण 117 विमान ग्राउंड
यह कुल फ्लीट का 13–15% है
एयरलाइंस को महंगे लीज़ पर विमान लेने पड़ रहे हैं
पुराने, कम ईंधन-कुशल विमानों का उपयोग बढ़ा
इंटरनेशनल उड़ानों पर असर
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में रूट बदलने (rerouting) की वजह से:
ईंधन खर्च बढ़ा
एयरपोर्ट चार्जेस में इजाफा हुआ
राहत के कुछ संकेत
मार्च 2026 में 89.5% पैसेंजर लोड फैक्टर (मांग बनी हुई)
सरकार ने अप्रैल से 3 महीने के लिए लैंडिंग और पार्किंग चार्ज में 25% की कटौती की
आउटलुक ‘नेगेटिव’
ICRA Limited ने सेक्टर का आउटलुक ‘स्टेबल’ से घटाकर ‘नेगेटिव’ कर दिया है।
आगे क्या?
ईंधन कीमतों में अस्थिरता, रुपये पर दबाव और वैश्विक तनाव के चलते एविएशन सेक्टर की रिकवरी अनिश्चित बनी हुई है। FY2027 में नुकसान कम होने की उम्मीद थी, लेकिन अब उस पर भी खतरा मंडरा रहा है।
