नई दिल्ली. भारत की डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री ने वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक का सबसे बड़ा कारोबार दर्ज किया है। इंडियन डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन (IDSA) की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार उद्योग का कुल कारोबार बढ़कर ₹23,021 करोड़ पहुंच गया है। इसके साथ ही देश में डायरेक्ट सेलर्स की संख्या 93 लाख के पार पहुंच गई है और महिलाओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
FY25 में 4 प्रतिशत की वृद्धि
Indian Direct Selling Association की 2025 आउटलुक रिपोर्ट, जिसे रिसर्च पार्टनर Ipsos ने तैयार किया है, के मुताबिक डायरेक्ट सेलिंग सेक्टर ने पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 4 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की।
FY 2023-24 में यह कारोबार ₹22,142 करोड़ था, जो FY 2024-25 में बढ़कर ₹23,021 करोड़ हो गया। पिछले छह वर्षों में उद्योग ने 6.5 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) बनाए रखी है।
आत्मनिर्भर भारत में बड़ी भूमिका: प्रवीण खंडेलवाल
नई दिल्ली में आयोजित एक उद्योग कार्यक्रम में रिपोर्ट जारी की गई। इस दौरान Praveen Khandelwal ने कहा कि डायरेक्ट सेलिंग सेक्टर देश में उद्यमिता, स्वरोजगार और समावेशी आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्र, जो स्वरोजगार और रिटेल भागीदारी को बढ़ावा देते हैं, भारत की आर्थिक यात्रा में अहम योगदान देंगे। डायरेक्ट सेलिंग मॉडल विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्गों के लोगों को रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध करा रहा है।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
रिपोर्ट के अनुसार सक्रिय डायरेक्ट सेलर्स की संख्या बढ़कर 93.2 लाख हो गई है, जो एक साल पहले 88 लाख थी। सबसे अहम बात यह रही कि महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 48 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि FY 2023-24 में यह 44 प्रतिशत थी। इससे यह संकेत मिलता है कि डायरेक्ट सेलिंग सेक्टर महिला उद्यमिता और वित्तीय समावेशन को तेजी से बढ़ावा दे रहा है।
उत्तर भारत सबसे बड़ा बाजार
क्षेत्रीय स्तर पर उत्तर भारत ने सबसे अधिक 27.58 प्रतिशत बिक्री हिस्सेदारी दर्ज की। इसके बाद पश्चिम भारत का हिस्सा 25.47 प्रतिशत रहा। पूर्वी भारत की हिस्सेदारी 22.47 प्रतिशत, दक्षिण भारत की 17.81 प्रतिशत और उत्तर-पूर्व क्षेत्र की 6.67 प्रतिशत रही।
महाराष्ट्र सबसे आगे
राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र ने सबसे अधिक 15.31 प्रतिशत ग्रॉस सेल्स में योगदान दिया। इसके बाद पश्चिम बंगाल 10.88 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश 8.82 प्रतिशत, कर्नाटक 6.37 प्रतिशत और बिहार 5.61 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रमुख राज्यों में शामिल रहे।
वेलनेस और न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों का दबदबा
उद्योग में सबसे अधिक बिक्री वेलनेस और न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों की रही, जिनकी हिस्सेदारी कुल बिक्री में लगभग 60 प्रतिशत रही।
कॉस्मेटिक्स और पर्सनल केयर उत्पादों ने 26 प्रतिशत योगदान दिया, जबकि घरेलू उत्पादों की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत रही। इन तीनों श्रेणियों ने मिलकर उद्योग की कुल बिक्री में 91 प्रतिशत से अधिक योगदान दिया।
नियामकीय ढांचे और भरोसे से बढ़ा उद्योग
एसोसिएशन के चेयरपर्सन Ratnesh Lal ने कहा कि उद्योग की लगातार वृद्धि और महिलाओं तथा नए उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी यह दिखाती है कि डायरेक्ट सेलिंग सेक्टर समावेशी आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बन सकता है।
उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों में स्थिर वृद्धि का श्रेय बेहतर नियामकीय ढांचे और उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे को जाता है।
नैतिक व्यापार और उपभोक्ता सुरक्षा पर जोर
रिपोर्ट में कहा गया कि उद्योग की सतत वृद्धि के लिए नैतिक व्यापारिक प्रथाओं, उत्पाद गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा मानकों को बनाए रखना बेहद जरूरी है।
2026 में कोरिया में होगा वैश्विक सम्मेलन
कार्यक्रम के दौरान World Federation of Direct Selling Associations की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Shaila Manyam ने वीडियो संदेश के जरिए डायरेक्ट सेलिंग उद्योग के वैश्विक महत्व पर जोर दिया।
इस दौरान यह भी घोषणा की गई कि WFDSA वर्ल्ड कांग्रेस 19 से 21 अक्टूबर 2026 तक कोरिया में आयोजित होगी, जिसमें दुनिया भर के उद्योग जगत के प्रमुख अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल होंगे।
ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में बढ़ रहा विस्तार
रिपोर्ट के मुताबिक डायरेक्ट सेलिंग मॉडल अब शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। रिटेल भागीदारी और स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों के चलते इस क्षेत्र का विस्तार लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती भागीदारी और देशभर में फैलते नेटवर्क के चलते डायरेक्ट सेलिंग सेक्टर भारत में रोजगार सृजन और उद्यमिता को मजबूत करने वाला एक बड़ा माध्यम बनता जा रहा है।
