नई दिल्ली: कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने निर्वाचन अधिकारी के फैसले को मनमाना, पक्षपातपूर्ण और कानून के विपरीत बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
नामांकन खारिज करने के आदेश को दी चुनौती
मीनाक्षी नटराजन ने अपनी याचिका में निर्वाचन अधिकारी द्वारा उनके नामांकन पत्र को खारिज किए जाने के आदेश को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनका नामांकन अस्वीकार करने का फैसला कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है और इससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई है। मामले में आज ही शीघ्र सुनवाई की मांग किए जाने की संभावना है।
नटराजन के चुनावी मुकाबले से बाहर होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा फायदा मिला है। भाजपा उम्मीदवार महेश केवट अब निर्विरोध निर्वाचित होने की स्थिति में हैं, जिससे पार्टी के लिए मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर जीत का रास्ता साफ हो गया है।
हलफनामे में जानकारी छिपाने का लगा आरोप
18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले मंगलवार को उस समय राजनीतिक हलचल बढ़ गई, जब मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया। उन पर चुनावी हलफनामे में एक न्यायालयीन शिकायत का उल्लेख नहीं करने का आरोप लगाया गया।
यह आपत्ति भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की ओर से उठाई गई थी। शिकायत पर विचार करने के बाद राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने कहा कि नटराजन ने नामांकन के साथ दाखिल किए गए फॉर्म-26 में आवश्यक जानकारी का खुलासा नहीं किया है। इसी आधार पर उनके नामांकन को अमान्य घोषित कर दिया गया।
चुनाव आयोग के सामने भी पहुंची कांग्रेस
नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने बुधवार को चुनाव आयोग का रुख किया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के.सी. वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला, जयराम रमेश, दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा, अभिषेक मनु सिंघवी और मीनाक्षी नटराजन ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर निर्णय को वापस लेने की मांग की।
कांग्रेस का कहना है कि जिस निजी शिकायत का हवाला देकर नामांकन रद्द किया गया, उस पर किसी अदालत ने संज्ञान नहीं लिया है। इसलिए नटराजन के खिलाफ कोई लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। पार्टी ने दावा किया कि नामांकन रद्द करने का फैसला कानूनी रूप से असंगत है।
मध्य प्रदेश में भाजपा की तीनों सीटों पर नजर
मीनाक्षी नटराजन के चुनावी दौड़ से बाहर होने के बाद भाजपा की राज्यसभा चुनाव में स्थिति और मजबूत हो गई है। विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल होने के कारण भाजपा पहले ही अपने अन्य उम्मीदवारों तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल की जीत को लेकर आश्वस्त थी।
अब महेश केवट के सामने कोई प्रभावी चुनौती नहीं बची है, जिससे उनके निर्विरोध चुने जाने की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की तीनों सीटों पर भाजपा का कब्जा लगभग तय माना जा रहा है।
