नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पानी की बढ़ती जरूरतों और जल प्रबंधन की चुनौतियों को लेकर व्यापक तैयारी की जरूरत बताई है। उन्होंने Urban Local Bodies यानी शहरी स्थानीय निकायों को जनसंख्या वृद्धि और भविष्य में पानी की मांग बढ़ने से पैदा होने वाली चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि शहरी स्थानीय निकायों के लिए भी इसी तरह के चिंतन शिविर आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि जल प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर स्थानीय स्तर पर प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके।
जल बचाने वाली तकनीकों को अपनाने पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संरक्षण के लिए Water-Saving Technologies को बड़े स्तर पर अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पानी के कुशल इस्तेमाल से जुड़ी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं का आयोजन किया जा सकता है। इन कार्यक्रमों में दुनिया के अलग-अलग देशों में अपनाई जा रही Global Best Practices से भारतीय निर्माताओं और संबंधित हितधारकों को परिचित कराया जाए, ताकि देश में प्रभावी जल संरक्षण समाधान विकसित करने और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने में मदद मिल सके।
दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में पीएम मोदी का संबोधन
प्रधानमंत्री ने यह बात जल शक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय National Departmental Summit on Water के समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने सम्मेलन के दौरान हुई गहन चर्चा और विचार-विमर्श की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि सम्मेलन से निकलने वाले Actionable और Time-Bound Action Points को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उनकी लगातार समीक्षा और फॉलो-अप किया जाना जरूरी है।
एक बार की कवायद न बने जल सम्मेलन
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि इस तरह के सम्मेलन को केवल एक बार होने वाली कवायद नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जल क्षेत्र में लिए गए फैसलों और तय किए गए लक्ष्यों की नियमित समीक्षा तथा उनके क्रियान्वयन से मिलने वाली सीख को आगे की रणनीति में शामिल करने की जरूरत बताई। इससे जल प्रबंधन के क्षेत्र में लगातार सुधार और बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद मिल सकती है।
जनभागीदारी बढ़ाने के लिए ‘जल उत्सव’ पर जोर
प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण के लिए Jan Bhagidari को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने लोगों के बीच पानी की बचत और जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘जल उत्सव’ को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। इसका उद्देश्य जल संरक्षण को सरकारी प्रयासों तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों को भी इससे जोड़ना है, ताकि पानी की उपलब्धता और उसके जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर सामाजिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाई जा सके।
डी-सिल्टिंग को बनाया जाए नियमित कार्यक्रम
पीएम मोदी ने जलाशयों और जल संरचनाओं की क्षमता बनाए रखने के लिए De-silting यानी गाद निकालने की प्रक्रिया को नियमित कार्यक्रम के रूप में अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने इसके लिए स्पष्ट मानदंड और Standard Operating Procedures यानी SOPs तैयार करने का सुझाव दिया, ताकि डी-सिल्टिंग का काम निर्धारित प्रक्रिया और वैज्ञानिक तरीके से नियमित रूप से किया जा सके।
मानसून से पहले बांधों की सुरक्षा पर विशेष तैयारी
Dam Safety को लेकर भी प्रधानमंत्री ने गंभीरता से तैयारी करने की बात कही। उन्होंने हर मानसून से पहले बांधों की सुरक्षा को लेकर व्यापक तैयारी, निर्धारित सावधानियों का पालन और जरूरी सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही स्कूल के विद्यार्थियों के बीच भी Dam Safety को लेकर जागरूकता बढ़ाने की बात कही। इसके लिए उपयुक्त विषयों को शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करने का सुझाव दिया गया।
विश्वविद्यालयों में जल प्रबंधन की पढ़ाई और क्षमता बढ़ाने की जरूरत
प्रधानमंत्री ने Universities और Higher Educational Institutions में Water Management और Water Governance से जुड़ी जानकारी तथा क्षमता को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि जल क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ ज्ञान और संस्थागत क्षमता को बढ़ाने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
राज्यों के बीच अध्ययन दौरे से साझा किए जाएं सफल मॉडल
पीएम मोदी ने Interstate Study Visits को भी बढ़ावा देने का सुझाव दिया। ऐसे दौरों में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों को शामिल किया जा सकता है, जिससे अलग-अलग राज्यों में अपनाई गई सफल जल प्रबंधन योजनाओं को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। इसके जरिए प्रभावी प्रयोगों और सफल व्यवस्थाओं को दूसरे क्षेत्रों में भी दोहराने में मदद मिल सकती है।
जल क्षेत्र में डेटा गवर्नेंस को बनाया जाए मजबूत
प्रधानमंत्री ने Water Data Governance को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि जल क्षेत्र से जुड़े अलग-अलग आंकड़ों को एक साथ लाकर व्यवस्थित तरीके से प्रबंधित किया जाना चाहिए। इसके बाद इन आंकड़ों का विश्लेषण कर उनका प्रभावी उपयोग जल प्रबंधन और नीति निर्माण में किया जा सकता है। पीएम मोदी ने Data Collection और Analysis के लिए Artificial Intelligence यानी AI के इस्तेमाल का सुझाव भी दिया और इसके लिए एक Uniform Format विकसित करने पर जोर दिया।
पानी की कमी से निपटने के लिए पहले से बने रणनीति
प्रधानमंत्री ने Water Scarcity से निपटने के लिए Anticipatory और Integrated Planning की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पानी की कमी की संभावित स्थिति को ध्यान में रखते हुए पहले से योजना तैयार की जानी चाहिए। साथ ही Treated Water यानी उपचारित पानी का कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में उपयुक्त इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जाना चाहिए। इससे उपलब्ध जल संसाधनों पर दबाव कम करने और पानी के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
जल संरक्षण को तकनीक, डेटा और जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर
प्रधानमंत्री के संबोधन में जल संरक्षण के लिए तकनीक, डेटा, शिक्षा, प्रशासन और जनभागीदारी को एक साथ आगे बढ़ाने पर विशेष जोर रहा। सरकार की कोशिशों के साथ स्थानीय निकायों, किसानों, उद्योगों, शिक्षण संस्थानों और आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाकर जल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम करने का संदेश दिया गया।
