नई दिल्ली. अमेरिका में H-1B Visa को लेकर ट्रंप प्रशासन ने एक और बड़ा बदलाव किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ H-1B वीजा आवेदनों से जुड़ी $100,000 payment requirement को एक और साल के लिए बढ़ा दिया है। यह शर्त पहली बार सितंबर 2025 में लागू की गई थी और अब नई घोषणा के बाद सितंबर 2027 तक जारी रह सकती है।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य अमेरिकी आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा करना, अमेरिकी कर्मचारियों और नए ग्रेजुएट्स के लिए रोजगार के अवसरों को मजबूत करना और H-1B कार्यक्रम में अधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों की भर्ती सुनिश्चित करना है।
किन H-1B आवेदनों पर लागू होगी $100,000 की शर्त?
नई घोषणा के अनुसार यह payment requirement मुख्य रूप से उन H-1B specialty occupation workers की entry से जुड़ी है, जो अमेरिका के बाहर हैं और जिनके नए petitions के साथ निर्धारित $100,000 payment नहीं है। हालांकि, राष्ट्रीय हित से जुड़ी विशेष परिस्थितियों में अमेरिकी प्रशासन कुछ मामलों में छूट देने का अधिकार रखता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका में पहले से रह रहे हर H-1B कर्मचारी को अचानक $100,000 का भुगतान करना होगा। मौजूदा घोषणा खास तौर पर अमेरिका में प्रवेश करने वाले कुछ नए H-1B workers पर केंद्रित है।
ट्रंप प्रशासन ने क्यों बढ़ाई फीस?
व्हाइट हाउस का कहना है कि H-1B कार्यक्रम का मूल उद्देश्य अत्यधिक कुशल और विशेषज्ञ विदेशी कर्मचारियों के जरिए अमेरिकी अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करना था। प्रशासन ने आरोप लगाया है कि कुछ कंपनियों, staffing groups और outsourcing firms ने इस कार्यक्रम का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम लागत वाले विदेशी श्रमिकों को लाने के लिए किया।
व्हाइट हाउस ने यह भी कहा कि 2025 में शुरू की गई payment requirement के बाद बड़ी IT outsourcing कंपनियों की H-1B registrations में 92 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यह आंकड़ा अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी तथ्य पत्र में दिया गया है।
H-1B Applications की जांच अब और सख्त होगी
$100,000 payment requirement बढ़ाने के साथ ट्रंप ने H-1B आवेदन प्रक्रिया में अतिरिक्त scrutiny का आदेश भी दिया है। नए executive order के तहत विदेश विभाग, श्रम विभाग और Department of Homeland Security समेत संबंधित एजेंसियां आपस में अधिक समन्वय करेंगी।
अब H-1B आवेदन की समीक्षा के दौरान sponsoring employer के हाल के या प्रस्तावित layoffs को भी ध्यान में रखा जा सकता है। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि कंपनी ने समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है या नहीं।
कंपनियों के रोजगार रिकॉर्ड की भी होगी समीक्षा
नई व्यवस्था के तहत अमेरिकी श्रम विभाग को पहले जमा किए गए Labour Condition Applications से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा शुरू करने का निर्देश दिया गया है। यह प्रक्रिया यह तय करने में मदद करेगी कि H-1B workers को sponsor करने वाले किसी employer के खिलाफ आगे अतिरिक्त कार्रवाई की जरूरत है या नहीं।
इस समीक्षा का उद्देश्य H-1B कार्यक्रम के इस्तेमाल और employers की hiring practices से संबंधित जानकारी को और करीब से देखना है।
भारतीय पेशेवरों पर भी पड़ सकता है असर
H-1B Visa भारतीय IT professionals और दूसरे highly skilled workers के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण रास्ता रहा है। अमेरिका में technology और specialized occupations में बड़ी संख्या में भारतीय professionals इस कार्यक्रम के जरिए काम करते हैं।
इसलिए H-1B fee और scrutiny में बदलाव का असर भारतीय technology workers, अमेरिकी कंपनियों और भारत-अमेरिका talent movement पर भी पड़ सकता है। हालांकि, किसी खास व्यक्ति के मामले में असर उसके visa status, petition और अमेरिका के भीतर या बाहर उसकी स्थिति पर निर्भर करेगा।
$100,000 फीस को कोर्ट में भी चुनौती
H-1B से जुड़ी $100,000 payment requirement को लेकर अमेरिका में कानूनी चुनौती भी जारी है। अलग-अलग अदालतों में इस नीति के खिलाफ मामले चल रहे हैं और इसके क्रियान्वयन को लेकर न्यायिक विवाद बना हुआ है।
इसी वजह से आगे इस नियम का अंतिम कानूनी स्वरूप अदालतों के फैसलों पर भी निर्भर कर सकता है। फिलहाल व्हाइट हाउस ने 2025 की व्यवस्था को अगले 12 महीनों के लिए बढ़ाने का फैसला किया है।
H-1B Policy में लगातार बदलाव
ट्रंप प्रशासन की यह घोषणा H-1B कार्यक्रम पर बढ़ती निगरानी की कड़ी का हिस्सा है। फीस बढ़ाने के साथ-साथ employers की hiring practices, अमेरिकी कर्मचारियों की layoffs और visa applications की जांच को लेकर भी अतिरिक्त प्रावधान किए गए हैं।
नई व्यवस्था के बाद H-1B sponsorship करने वाली कंपनियों के लिए लागत और compliance requirements बढ़ सकती हैं, जबकि विदेशी कर्मचारियों के लिए अमेरिका में नए अवसरों की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक जांच के दायरे में रह सकती है।
