नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय अर्थव्यवस्था की अगली विकास यात्रा में कंपनियों की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि देश की खपत और बाजार का विस्तार केवल शहरी संपन्न वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने उद्योग जगत से व्यापक उपभोक्ता आधार को ध्यान में रखते हुए कारोबार की रणनीति तैयार करने और विकास के नए क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। सीतारमण ने यह बात नई दिल्ली में आयोजित ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के 53वें नेशनल मैनेजमेंट कन्वेंशन में कही। यह सम्मेलन 21 और 22 सितंबर को आयोजित किया गया।
भारत की ग्रोथ में कंपनियों की भागीदारी जरूरी
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के विकास की जरूरतों का बड़ा हिस्सा बाजार के माध्यम से पूरा किया जा सकता है। ऐसे में उद्योग जगत को आगे बढ़कर इन जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए अवसर तैयार कर रही है।
सीतारमण ने कंपनियों से केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित रहने के बजाय वैल्यू क्रिएशन के नए क्षेत्रों पर ध्यान देने को कहा। उनके मुताबिक भारत की महत्वाकांक्षा केवल मैन्युफैक्चरिंग तक नहीं होनी चाहिए, बल्कि देश को डिजाइन, बौद्धिक संपदा और तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा।
केवल शहरी प्रीमियम ग्राहकों पर निर्भर न रहें कंपनियां
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में खपत की अगली लहर केवल संपन्न शहरी परिवारों के दम पर नहीं आएगी। जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ेगी और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, वैसे-वैसे गैर-जरूरी और बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों तथा सेवाओं पर खर्च भी बढ़ सकता है। इससे हेल्थकेयर, पर्सनल वेलनेस, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और क्वालिटी सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में नए अवसर बन सकते हैं।
उन्होंने उद्योग जगत को चेताया कि कारोबार की रणनीति बनाते समय केवल औपचारिक शहरी और संपन्न उपभोक्ताओं को केंद्र में रखना पर्याप्त नहीं होगा। कृषि, ग्रामीण निर्माण, परिवहन और अनौपचारिक कारोबार से जुड़े कामकाजी परिवार भी देश के बढ़ते उपभोक्ता बाजार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
बढ़ती आय से बदल सकता है खर्च का पैटर्न
सीतारमण ने भारत की अर्थव्यवस्था को एक ऐसे दौर में बताया जहां आय में वृद्धि और लोगों की आर्थिक स्थिति में बदलाव से उपभोग के तरीके भी बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आय बढ़ने के साथ लोगों का खर्च धीरे-धीरे बुनियादी जरूरतों से आगे बढ़कर विवेकाधीन यानी अपनी पसंद और सुविधा से जुड़े क्षेत्रों की ओर जा सकता है।
ऐसे बदलाव को देखते हुए कंपनियों के लिए छोटे शहरों, ग्रामीण बाजारों और अलग-अलग आय वर्गों की जरूरतों को समझना महत्वपूर्ण हो सकता है। वित्त मंत्री के संबोधन का एक प्रमुख संदेश यही था कि भारत के अगले चरण की खपत का आधार ज्यादा व्यापक होना चाहिए।
सरकारी निवेश से मजबूत हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर
वित्त मंत्री ने निजी क्षेत्र की भूमिका को सरकार के बड़े निवेश कार्यक्रमों से जोड़ते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए जा रहे खर्च का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। राज्यों को पूंजीगत संपत्तियां बनाने के लिए दिए जाने वाले अनुदान को शामिल करने पर प्रभावी पूंजीगत व्यय 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
सीतारमण ने रेलवे के लगभग पूर्ण विद्युतीकरण और 1,670 मिलियन टन के रिकॉर्ड माल ढुलाई आंकड़े का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, ये आंकड़े देश में बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में हो रही प्रगति को दिखाते हैं।
निवेश पर ज्यादा जोर देने की बात
वित्त मंत्री ने भारत की सार्वजनिक वित्त व्यवस्था में हो रहे बदलाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकारी उधारी का इस्तेमाल धीरे-धीरे उपभोग के बजाय निवेश और पूंजी निर्माण की दिशा में ज्यादा किया जा रहा है। उनके मुताबिक यह बदलाव भारत की आर्थिक संरचना में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है।
टेक्नोलॉजी और ग्लोबल वैल्यू चेन पर फोकस
सीतारमण ने भारतीय कंपनियों से ग्लोबल वैल्यू चेन में देश की भूमिका को मजबूत करने के लिए अपनी तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत को केवल दूसरे देशों के लिए उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन उत्पादों के पीछे मौजूद डिजाइन, तकनीक और बौद्धिक संपदा को भी देश में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने उद्योग जगत से ऐसे संस्थान और कंपनियां तैयार करने पर जोर दिया जो बड़े स्तर पर काम करने के साथ-साथ तकनीकी क्षमता, गुणवत्ता, बेहतर प्रबंधन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिहाज से मजबूत हों। AIMA के इस वर्ष के सम्मेलन की थीम भी “Transforming for Tomorrow: Growth with Resilience” रही।
आर्थिक बदलाव के अहम दौर में भारत
वित्त मंत्री ने भारत को आर्थिक बदलाव के एक महत्वपूर्ण चरण में बताया। उनके संबोधन में व्यापक उपभोक्ता आधार, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और उच्च मूल्य वाली तकनीकी क्षमताओं को भारत की आगे की आर्थिक यात्रा से जोड़कर देखा गया। इस दौरान उन्होंने उद्योग जगत से बदलते बाजार, आय और उपभोक्ता मांग के अनुरूप अपनी रणनीतियों को विकसित करने का आह्वान किया।
