नई दिल्ली. बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार, 4 अक्टूबर को बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ और उससे होने वाले नुकसान को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि बिहार में हर साल बाढ़ आती है, लोग प्रभावित होते हैं और परिवारों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने सवाल किया कि पिछले 17 वर्षों में इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
राहुल गांधी ने पूछा- हर साल राहत क्यों, स्थायी समाधान क्यों नहीं?
राहुल गांधी ने कहा कि बिहार की बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है। उनके मुताबिक, हर साल बाढ़ के दौरान मौतें होती हैं, लोगों के घर-परिवार प्रभावित होते हैं और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित होते हैं। उन्होंने सरकार से यह बताने को कहा कि इतने वर्षों में जमीन पर क्या बदलाव आया है। राहुल गांधी ने कहा कि बिहार के लोगों को हर साल केवल राहत और आश्वासन नहीं, बल्कि बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए स्थायी समाधान की जरूरत है।
तेजस्वी यादव ने भी सरकार को घेरा
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी बाढ़ की स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारी बारिश से फसलें बर्बाद होने के बाद भी कई किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। तेजस्वी ने महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी और अपराध जैसे मुद्दों को भी सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए सवाल उठाए।
पप्पू यादव बोले- राहत के लिए 5 हजार करोड़ रुपये दिए जाएं
स्वतंत्र सांसद पप्पू यादव ने भी सारण और छपरा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि प्रभावित क्षेत्रों में जनरेटर, पॉलिथीन शीट, सामुदायिक रसोई, चिकित्सा सुविधाओं और हैंडपंप जैसी जरूरी व्यवस्थाओं की कमी है। पप्पू यादव के मुताबिक, उन्होंने अपने स्तर पर कई जगहों पर इन सुविधाओं की व्यवस्था कराई। उन्होंने केंद्र सरकार से बिहार के लिए 5,000 करोड़ रुपये की राहत राशि जारी करने की मांग की।
पप्पू यादव ने बाढ़ राहत कार्यों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग भी की। उन्होंने सिंचाई विभाग से जुड़े ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई और संबंधित मंत्री के इस्तीफे की मांग की। ये उनके राजनीतिक आरोप और मांगें हैं, जिन पर सरकार की ओर से अलग-अलग स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाए जाने की जानकारी दी गई है।
सरकार ने सारण में शुरू किया एयरड्रॉप ऑपरेशन
बाढ़ प्रभावित इलाकों तक सड़क के रास्ते राहत सामग्री पहुंचाने में परेशानी को देखते हुए सारण जिले में भारतीय वायु सेना के हेलिकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग ने गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के साथ समन्वय कर राहत सामग्री को दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए एयरड्रॉप ऑपरेशन चलाया। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, 15 उड़ानों के जरिए 5,600 से ज्यादा ड्राई राशन पैकेट और 28 टन से अधिक खाद्य सामग्री बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचाई गई है।
प्रशासन के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है और जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है, वहां वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारतीय वायु सेना के हेलिकॉप्टरों के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने के साथ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक निकालने का काम भी किया जा रहा है।
बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर
बिहार के कई जिलों में भारी बारिश और गंडक नदी के बढ़े जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। हाल के दिनों में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और दरभंगा समेत कई जिलों में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन और राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं।
