नई दिल्ली. नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई Union Cabinet की बैठक में Transport, Infrastructure और Small and Medium Enterprises यानी SMEs से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। Cabinet ने देश में Transport और Logistics व्यवस्था को एकीकृत तरीके से विकसित करने के लिए Integrated Transport and Logistics Authority (ITLA) के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। नई Authority का उद्देश्य अलग-अलग Transport Modes के बीच बेहतर Coordination स्थापित करना और देश के लिए Long-Term Transport Plan तैयार करना होगा।
ITLA के तहत Roads, Railways, Ports and Shipping, Civil Aviation, Inland Waterways, Coastal Shipping, Urban Mobility और Logistics जैसे क्षेत्रों को एक साझा Transport Planning Framework में शामिल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि अलग-अलग परिवहन माध्यमों की योजनाओं के बीच बेहतर तालमेल से Infrastructure Development को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। Authority Transport और Logistics से जुड़े बड़े Projects की निगरानी और उनके Implementation में आने वाली दिक्कतों के समाधान के लिए भी Coordinated Mechanism उपलब्ध कराएगी।
₹500 करोड़ से ज्यादा के Projects की होगी Technical Appraisal
नई Integrated Transport and Logistics Authority को ₹500 करोड़ या उससे अधिक लागत वाली Government Infrastructure Projects की Technical Appraisal करने की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। हालांकि, इन Projects की Financial Appraisal मौजूदा Financial Appraisal Mechanisms के जरिए ही जारी रहेगी। इसका मतलब है कि ITLA मुख्य रूप से Projects की तकनीकी व्यवहार्यता, Transport Connectivity और Implementation से जुड़े पहलुओं का आकलन करेगी।
Authority ₹500 करोड़ से अधिक की Transport और Infrastructure Projects की Implementation Progress पर भी नजर रखेगी। इसके साथ ही Projects के दौरान सामने आने वाले विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए Coordination की व्यवस्था करेगी। Project पूरा होने के बाद उसके Impact का Post-Implementation Assessment भी किया जाएगा, जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि संबंधित Infrastructure Project से अपेक्षित परिणाम हासिल हुए या नहीं।
SMEs के लिए ₹10,000 करोड़ का Growth Fund
Union Cabinet ने देश के Small and Medium Enterprises (SMEs) को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ के SME Growth Fund (SGF) की स्थापना को भी मंजूरी दी है। इस Fund का इस्तेमाल SMEs में Direct Equity Investment के लिए किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य ऐसे Enterprises को Growth Capital उपलब्ध कराना है, जो आगे चलकर बड़े और globally competitive Indian companies के रूप में विकसित हो सकें।
सरकार के अनुसार, SME Growth Fund Manufacturing, Services, Technology, Innovation-driven Sectors और Strategic Value Chains से जुड़े छोटे एवं मध्यम उद्योगों को Growth-oriented Capital उपलब्ध कराने में मदद करेगा। इससे ऐसे Businesses को विस्तार करने, नई Technology अपनाने और अपने कारोबार को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए आवश्यक Capital मिल सकेगा।
Union Budget 2026-27 में हुआ था Fund का ऐलान
₹10,000 करोड़ के SME Growth Fund की घोषणा Union Budget 2026-27 में की गई थी। Cabinet की मंजूरी के बाद अब इस Fund को स्थापित करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार का कहना है कि यह पहल देश के Entrepreneurship Ecosystem को मजबूत करने और Growth-stage Enterprises के लिए Domestic Capital Market को और गहरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सरकार के मुताबिक, SME Growth Fund का उद्देश्य केवल मौजूदा SMEs को आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि ऐसे Indian Enterprises तैयार करना है जो भविष्य में वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें। सरकार ने इसे Viksit Bharat 2047 के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा है कि मजबूत Entrepreneurship Ecosystem, Innovation और घरेलू Capital Formation देश की आर्थिक क्षमता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
इन दोनों फैसलों के जरिए सरकार ने एक तरफ Transport और Logistics Infrastructure में बेहतर Coordination पर जोर दिया है, वहीं दूसरी ओर SMEs के लिए Growth Capital उपलब्ध कराने की कोशिश की है। ITLA जहां देश की Long-Term Transport Planning और बड़े Infrastructure Projects की निगरानी में भूमिका निभाएगी, वहीं SME Growth Fund छोटे और मध्यम कारोबारों को बड़े Enterprises में बदलने के लिए पूंजी उपलब्ध कराने पर केंद्रित रहेगा।
