नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर याचिका पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किया है। यह याचिका लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की ओर से दायर की गई है। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राहुल गांधी के आचरण पर भी टिप्पणी की और उनसे स्पष्टीकरण देने को कहा।
राहुल गांधी के आचरण पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राहुल गांधी के अदालत तक मार्च करने की घटना का उल्लेख करते हुए उनके आचरण पर सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से नोटिस स्वीकार करने की प्रक्रिया फिलहाल अस्थायी रूप से होगी और यह राहुल गांधी के आचरण पर स्पष्टीकरण देने की शर्त पर निर्भर करेगी। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कोई भी न्यायपालिका पर दबाव नहीं बना सकता।
यह मामला मतदाता सूची के SIR अभियान में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है। INDIA गठबंधन के नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अदालत का रुख किया है।
जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल घोषित करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर को फिर से आधिकारिक प्रदर्शन स्थल घोषित करने की मांग पर दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी किया है। याचिका में सवाल उठाया गया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से क्यों हटाया गया। यह मामला कॉकroach जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के बीच सामने आया है। प्रदर्शनकारी SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
अदालत ने दिल्ली सरकार से जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटाने के कारणों पर जवाब मांगा। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि राजधानी में प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशने के उद्देश्य से पहले ही एक समिति गठित की जा चुकी है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने तकनीक के बदलते दौर का जिक्र करते हुए कहा कि किसी मुद्दे को सुने जाने की अवधारणा को तकनीकी संदर्भ में भी समझना होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश के प्रशासनिक केंद्र के नजदीक ही प्रदर्शन स्थल होना जरूरी है। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने तर्क दिया कि इसी सोच के आधार पर तो कोई व्यक्ति केरल से भी प्रदर्शन कर सकता है।
प्रदर्शन के दौरान BNSS की धाराएं लगाने पर दिल्ली पुलिस को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 172 और धारा 163 लागू किए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस को भी नोटिस जारी किया। अदालत ने इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा।
सुनवाई में यह दलील भी सामने आई कि प्रदर्शनकारियों के लिए विरोध स्थल नजदीक होना चाहिए। वहीं, जस्टिस बागची ने सवाल उठाया कि तकनीक के मौजूदा दौर में किसी खास स्थान पर प्रदर्शन करने की आवश्यकता को किस तरह देखा जाना चाहिए।
महिला पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा
सुनवाई के दौरान प्रदर्शन में महिला पत्रकारों के साथ कथित यौन हिंसा और उत्पीड़न का मुद्दा भी उठाया गया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा के पक्ष में है, जिनमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन में शामिल कुछ लोग वीडियो और रील बनाने के लिए आते हैं, जिससे यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन पत्रकार है और कौन अन्य उद्देश्य से वहां मौजूद है।
सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणियां और नोटिस उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आए, जिसमें INDIA गठबंधन के नेताओं ने कथित चुनावी अनियमितताओं का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगते हुए मामले में आगे की सुनवाई का रास्ता खुला रखा है।
