नई दिल्ली. दिल्ली में लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा प्रतिबंधों का असर अब राजधानी के प्रमुख बाजारों के कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। खान मार्केट और कनॉट प्लेस के व्यापारियों ने त्योहारों के मौसम में ग्राहकों की घटती संख्या और कारोबार में हो रहे नुकसान को लेकर चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि बार-बार बाजार बंद होने, बैरिकेडिंग और आवाजाही पर पाबंदियों के कारण उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है।
खान मार्केट एसोसिएशन ने कारोबार पर पड़ रहे असर को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भी अपनी चिंताओं से अवगत कराया है। वहीं, कनॉट प्लेस के दुकानदारों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था और रास्ते बंद होने की आशंका के चलते ग्राहक बाजार आने से कतरा रहे हैं।
16 और 17 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद रखने के फैसले ने व्यापारियों की चिंता और बढ़ा दी है। यह कदम Cockroach Janta Party (CJP) के प्रस्तावित ‘Lehra Do Tiranga’ मार्च से पहले उठाया गया। व्यापारियों को आशंका है कि इससे बिक्री में और गिरावट आ सकती है। इस बीच, नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन भी हालिया CJP और कांग्रेस के प्रदर्शनों से कारोबार पर पड़े असर को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाली है।
खान मार्केट एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी दखल की मांग
खान मार्केट एसोसिएशन ने लगातार हो रहे प्रदर्शनों और उनके कारण कारोबार में आ रही बाधाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। व्यापारियों का कहना है कि सामान्य व्यावसायिक गतिविधियां बाधित होने से उनकी कमाई पर असर पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि कारोबारियों की परेशानियों को भी सुना जाए, क्योंकि प्रदर्शनों के दौरान लगने वाले प्रतिबंधों का सीधा असर उन पर पड़ रहा है।
एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भी इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की है। व्यापारियों के मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों के कारण ग्राहक बाजार आने से बच रहे हैं, जिससे दुकानों की बिक्री लगातार प्रभावित हो रही है।
एसोसिएशन का दावा है कि खान मार्केट को प्रतिदिन करीब 50 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। व्यापारियों के अनुसार, कुछ प्रतिष्ठानों में दुकानों का दैनिक किराया तीन लाख रुपये तक पहुंच जाता है। ऐसे में ग्राहकों की संख्या घटने से कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
कनॉट प्लेस में बिक्री 20 से 25 प्रतिशत तक रहने की शिकायत
दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र कनॉट प्लेस में भी दुकानदारों ने कारोबार प्रभावित होने की बात कही है। व्यापारियों के अनुसार, बैरिकेडिंग और रास्तों पर प्रतिबंध लगने की आशंका से ग्राहक बाजार आने से बच रहे हैं।
कनॉट प्लेस में करीब 2,000 दुकानें हैं। इनमें इनर, मिडिल और आउटर सर्कल में लगभग 1,300 से 1,400 प्रतिष्ठान शामिल हैं। इसके अलावा यहां कई कार्यालय, कैफे और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां भी संचालित होती हैं। पास में स्थित पालिका बाजार में लगभग 300 भूमिगत दुकानें हैं, जबकि शंकर मार्केट में करीब 200 दुकानें हैं। व्यापारियों को डर है कि कनॉट प्लेस के आसपास होने वाली गतिविधियों का असर इन बाजारों पर भी पड़ सकता है।
सेंट्रल पार्क बंद होने से दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों का अनुमान है कि ग्राहकों की आवाजाही में करीब 25 प्रतिशत तक अतिरिक्त गिरावट आ सकती है, क्योंकि लोग प्रतिबंधों की आशंका के चलते इस इलाके में आने से बचेंगे।
‘लोगों को लगता है कि बाजार बंद है’
कनॉट प्लेस में दुकान चलाने वाले विनोद कुमार के अनुसार, कई ग्राहक इस आशंका से बाजार नहीं आ रहे कि प्रदर्शन के कारण पूरे इलाके में रास्ते बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बाजार तक पहुंचना मुश्किल होने की धारणा से भी दुकानों की बिक्री प्रभावित हो रही है।
एक स्टोर मैनेजर ने बताया कि कारोबार सामान्य स्तर के मुकाबले घटकर केवल 20 से 25 प्रतिशत रह गया है। इससे कर्मचारियों की तनख्वाह और दुकान के अन्य खर्च पूरे करना मुश्किल हो सकता है। दुकानदारों का कहना है कि बिक्री में लगातार गिरावट रहने पर वे वेतन और परिचालन खर्चों का भुगतान करने में परेशानी महसूस करेंगे।
ज्वेलरी और कपड़ों की दुकानों पर भी असर
प्रदर्शनों और सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण आभूषण कारोबार से जुड़े दुकानदार भी परेशान हैं। एक ज्वेलरी कारोबारी के मुताबिक, गहनों की खरीदारी आमतौर पर पहले से योजना बनाकर की जाती है, लेकिन ग्राहक अब बैरिकेडिंग और बाजार में प्रवेश या बाहर निकलने में होने वाली परेशानी के डर से यहां आने से बच रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि लोग केवल खरीदारी के लिए किसी टकराव या पुलिस कार्रवाई की आशंका का सामना नहीं करना चाहते। कपड़ों की दुकानों के संचालकों ने भी कारोबार कमजोर होने की बात कही है। एक दुकानदार के अनुसार, 10 अक्टूबर को भी दुकान बंद रखनी पड़ी थी, जिससे नुकसान बढ़ा।
व्यापारियों को कर्मचारियों की आजीविका की चिंता
दुकानदारों के मुताबिक, कारोबार में गिरावट का असर केवल दैनिक बिक्री तक सीमित नहीं है। ग्राहकों की कमी से कर्मचारियों के वेतन, किराये और अन्य जरूरी खर्चों का भुगतान प्रभावित हो सकता है। छोटे कारोबारियों के लिए लंबे समय तक ऐसी स्थिति बनी रहना दुकानों को चालू रखना भी मुश्किल बना सकता है।
व्यापारियों का कहना है कि लगातार होने वाले प्रदर्शनों और सुरक्षा प्रतिबंधों से ग्राहकों के बीच अनिश्चितता बढ़ रही है। उन्हें आशंका है कि यदि बाजारों में सामान्य गतिविधियां बहाल नहीं हुईं, तो आर्थिक नुकसान और गहरा सकता है।
