नई दिल्ली. तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के प्रमुख एमके स्टालिन ने शनिवार को चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय ‘अन्ना अरिवालयम’ में सांसदों के साथ अहम बैठक की। बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई। इस दौरान DMK ने चार प्रस्ताव पारित किए और चुनावी प्रक्रिया में सुधार की मांग उठाई।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
बैठक के बाद पार्टी की ओर से जारी बयान के अनुसार, DMK ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने का फैसला किया। इसके अलावा पार्टी ने छात्र संगठनों का समर्थन करने, कांग्रेस और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के कथित दोहरे रवैये की आलोचना करने और चुनावी अनियमितताओं को दूर करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपने से जुड़े प्रस्ताव भी पारित किए।
पार्टी ने SIR को पूरी तरह रद्द करने और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग भी दोहराई। DMK के बयान में कहा गया कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए राष्ट्रपति को याचिका सौंपी जाएगी।
SIR के खिलाफ पहले से विरोध कर रही DMK
DMK लंबे समय से विशेष गहन पुनरीक्षण का विरोध करती रही है। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, दिल्ली में कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन से DMK ने दूरी बनाए रखी है।
शुक्रवार को DMK की उप महासचिव कनिमोझी ने भी SIR को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार के रवैये से ऐसा लगता है कि उसे संविधान पर भरोसा नहीं है। कनिमोझी ने मांग की कि मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें न्याय मिलना चाहिए और पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में शामिल किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि DMK लगातार लोगों को SIR के संभावित प्रभावों के प्रति आगाह करती रही है। पार्टी प्रमुख एमके स्टालिन भी चुनाव से पहले इस प्रक्रिया का विरोध करते रहे हैं। DMK का कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है।
कांग्रेस और DMK के बीच गठबंधन खत्म
DMK पहले कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की प्रमुख सहयोगी थी। हालांकि, 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए। रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के साथ हाथ मिला लिया, जिसके बाद DMK और कांग्रेस का गठबंधन समाप्त हो गया। विधानसभा चुनाव में DMK को सत्ता से बाहर होना पड़ा।
इसके बाद से DMK के अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की संभावना भी चर्चा में रही है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में किसी फैसले की पुष्टि नहीं की गई है।
BJP के साथ पहले भी गठबंधन कर चुकी है DMK
DMK और BJP इससे पहले भी साथ काम कर चुकी हैं। दोनों दल 1999 से 2004 की शुरुआत तक तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थे। ऐसे में SIR के मुद्दे पर DMK के ताजा फैसले और कांग्रेस से दूरी के बीच राज्य की राजनीति में आगे होने वाले बदलावों पर नजर बनी हुई है।
