सोलन. सोलन के जियालाल ठाकुर पेशे से चालक हैं, लेकिन वैदिक संस्कृति ने आज उन्हें शोधकर्ता बना दिया. उन्होंने वैदिक ताल पर विश्व का पहला शोध पत्र हिमाचल विश्वविद्यालय और भाषा विभाग को प्रस्तुत किया.
जियालाल ने इसलिए यह विषय चुना
जियालाल का दावा है कि आज तक विश्व में वैदिक ताल को लेकर कोई शोध नहीं हुआ है. जिसके चलते भारतीय वैदिक संस्कृति मुगल काल से विस्थापित रही है. इसलिए उन्होंने इस विषय को चुना ताकि वैज्ञानिक तकनीक से सोचने वाली विकसित बुद्धि की युवा पीढ़ी को उनकी वैदिक संस्कृति की जानकारी मिल सके.
उन्होंने कहा कि वैदिक संस्कृति के पतन का सबसे बड़ा कारण 1932 में भारत में आने वाला फिल्म जगत था. जिसमें भारतीय संस्कृति को जबरन पाश्चात्य संस्कृति की गोद में बिठा दिया गया. जिसके बाद किसी भी व्यक्ति ने अपनी संस्कृति को जानने की कोशिश भी नहीं की. उन्होंने कहा कि राजघरानों की ख्याल गायकी को लिपिबद्ध कर प्रमाणिकता दिलवाई गई. जिसके आधार पर शास्त्री संगीत को विकसित किया गया.