सफाई में फिर पिछड़ा शिमला, पहुंचा 128वें रैंक पर

सफाई में फिर पिछड़ा शिमला, पहुंचा 128वें रैंक पर-Panchayat Times
प्रतीक चित्र

शिमला. शहर की सफाई व्यवस्था पर कर्मचारियों के वेतन व अन्य व्यवस्थाओं पर हर साल करोड़ो की रकम खर्च करने वाले शिमला की स्वच्छता सर्वेक्षण में फिर किरकिरी हुई है. पहाड़ों की रानी शिमला देश के स्वच्छ शहरों के मुकाबले में पहले 50 पायदान में भी जगह नहीं बना सकी है. स्वच्छता रैंकिंग में शिमला की रैंकिंग किस कदर गिर रही इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि साल 2014 में 14 वें रैंक पर रहने वाला शिमला 2019 में 128 वीं रैंकिंग पर पहुंच गया है.

अलबत्ता निगम का दावा है कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में खुद को गारबेज फ्री घोषित करना भी उस पर भारी पड़ा है. इसका नुकसान शिमला को हुआ. शहर स्वच्छता रैंकिंग में देश भर में 128वें स्थान पर आया है. स्वच्छता सर्वेक्षण में शिणला की रैंकिंग गिर रही है, मगर इंदौर लगातार पहले पायदान पर बना हुआ है. तीन लाख से कम आबादी वाली शहरें में भी शिमला पहली पायदान पर खड़े एनएमडीसी के आसपास नहीं. साथ ही देश की सबसे स्वच्छ राज्यों की राजधानियों में तो इसका उल्लेख तक नहीं है.

स्वच्छता सर्वेक्षण में 4237 शहरों के बीच स्वच्छता रैकिंग का मुकाबला हुआ, इसके लिए शहरों में 4 से 31 जनवरी के बीच सर्वेेक्षण किया गया. बीते वर्ष 2018 में शिमला 144वें रैंक पर रहा जिसमें शिमला का मुकाबला 4203 शहरो से था. बीते वर्ष के मुकाबले इस बार मात्र 34 शहर सर्वेक्षण में जुडे थे, लेकिन इस बार सर्वेक्षण के अंक 4000 से बड़ा कर 5000 किए गए थे. वहीं सैवन स्टार रेटिंग के एक हजार अंको से हाथ धोने के बाद शिमला शहर ने 4000 अंको पर मुकाबला किया , जिससे वह उम्मीद से बहुत नीचे रेंकिग में पहुंच गया.

बता दें कि भारत सरकार ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 के आधार पर देश के सबसे स्वच्छ और साफ शहरों के नाम का ऐलान बुधवार को राष्ट्रपति भवन में किया. सबसे स्वच्छ शहर का खिताब एक बार फिर इंदौर के नाम रहा और भोपाल सबसे स्वच्छ राजधानी वर्ग में पहले स्थान पर रहा. वहीं इस सर्वे में छत्तीसगढ़ को बेस्ट परफॉर्मेंस स्टेट अवार्ड से नवाजा गया है. 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में अहमदाबाद और पांच लाख से कम आबादी वाले शहरों में उज्जैन पहले स्थान पर रहे.