निराशाजनक बजट,प्रदेश की जनता के साथ हुआ छलावा: बाबूलाल मरांडी

बाबूलाल मरांडी की पहल से 9 राज्यों में फंसे 3852 प्रवासी मजदूरों तक पहुंची सहायता-Panchayat Times
साभार इंटरनेट

रांची. भाजपा नेता विधायकदल एवम राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार के द्वारा मंगलवार को विधानसभा में प्रस्तुत किये गए बजट को पूर्णतः निराशाजनक एंव प्रदेश की जनता के लिए छलावा मात्र बताया.

मरांडी ने कहा कि यह बजट गांव ,गरीब ,किसान,मजदूर,युवा बेरोजगार सबको निराश करने वाला बजट है. राज्य की जनता का इससे कुछ भी भला होने वाला नहीं है. इस बजट में न तो गरीबी दूर करने की दिशा में कोई प्रयास दिखाई पड़ता है,न ही मजदूरों के मजदूरी बढ़ाने पर विचार किया गया है. गरीबों,आदिवासियों के कल्याण की बात करने वाली सरकार ने मनरेगा के कार्य दिवस और मजदूरी की राशि बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास नहीं किये.

उन्होंने कहा कि आज गांव से मजदूरी करने आये मजदूर काम के अभाव में वापस लौट जातें हैं. जिसमें सर्वाधिक संख्या दलित,आदिवासी समाज के ही लोग रहते हैं. सरकार कुछ नहीं तो मनरेगा की मजदूरी ही 300 रुपए बढ़ाकर करदेती तो गरीबों की आय में बड़ी वृद्धि होती. सरकार ने अपने आर्थिक सर्वेक्षण को आधार माना होता तो गरीबों की आय बढ़ाने की दिशा में सार्थक प्रावधान करती है लेकिन सरकार की सोच गरीबों के लिये नहीं है.

उन्होंने कहा कि सरकार की ऋण माफी की घोषणा भी धोखा है. इसे श्रेणी और दायरों में सीमित करके लाखों किसानों को धोखा दिया गया है. इसके अतिरिक्त हेमंत सरकार रघुवर सरकार द्वारा चलाई गई. कृषि आशीर्वाद योजना,पंप सेट वितरण योजना को बंद करने की घोषणा करके उनके उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.

इस बजट ने युवाओं ,बेरोजगारों को सर्वाधिक निराश किया है. युवा बेरोजगार चुनावी वायदों के अनुरूप बेरोजगारी भत्ता की आशा कर रहे थे. लेकिन उसे भी सीमाबद्ध कर मात्र खाना पूर्ति ही की गई है. पारा शिक्षकों को भी वेतनमान की घोषणा नहीं करने से वह पूरी तरह छला महसूस कर रहे हैं.

मरांडी ने कहा कि कृषि प्रधान देश मे कृषि रोजगार का सबसे बड़ा क्षेत्र है. लेकिन सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिये मात्र 3 हजार करोड़ का प्रावधान करके किसानों को हताश किया है. तकनीकी शिक्षा सरकार की प्राथमिकता में नहीं है. छात्राओं की तकनीकी शिक्षा के लिये मात्र 10 करोड़ का प्रावधान कोई मायने नहीं रखता,यह केवल आंखों में धूल झोंकने जैसा है.
मरांडी ने कहा कि आधारभूत संरचना पर भी यह सरकार गंभीर नही है. ग्रामीण सड़क,ग्राम सेतु योजना,उच्च पथ निर्माण की दिशा में किये गए प्रावधान भी निराशाजनक है.