गुड़िया मामला : जय राम ठाकूर से मिले गुड़िया के परिजन, फिर से उठाई जांच की मांग

गुड़िया मामला : जय राम ठाकूर से मिले गुड़िया के परिजन, फिर से उठाई जांच की मांग-Panchayat Times
साभार : ऑफिसियल फेसबुक जय राम ठाकुर

शिमला. गुजरात फोंरेसिक लैब के एक्सपर्ट के हल्फनामें और बयान के बाद कोटखाई गुड़िया प्रकरण की फिर जांच करनेकी मांग उठ गई है. प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकूर से गुड़िया के परिजनों ने मिलकर इस मामले की फिर जांच करने के लिए न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी का गठन करने या फिर सर्वोच्च न्यायालय से जांच कमेटी के गठन की सिफारिश करने का आग्रह किया है.

गुडिया की मां ने सिसकती आंखो से मुख्यमंत्री से कहा कि सरकार ने गुड़िया के नाम पर कई सुरक्षा ऐप बनाए है पर गुडिया अभी भी न्याय के लिए तरस रही है. सीबीआई की अलग अलग जांच और तथ्य सामने आने पर विश्वास नहीं हो रहा है. एक तरफ सीबीआई यह दावा कर रही है कि फोंरेसिक लैब से मिले तथ्य के आधार पर आरोपी चिरानी को पकड़ा गया है, वहीं दुसरी तरफ गुजरात फोंरेसिक लैब के एक्सपर्ट अदालत में हल्फ्नामें और बयान दे रहे है कि गुड़िया के साथ दरिंदगी करने वाले एक से अधिक थे.

गुड़िया की मां ने मुख्यमंत्री के समक्ष कहा कि अब सीबीआई द्वारा की गई जांच और गिरफ्तारी पर भी विश्वास नही हो रहा है. आखिर गुड़ियाको कब न्याय मिलेगा. फोरेंसिक विभाग के दो सहायक निदेशकों के बयान के बाद अब गुड़िया मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए व पूरे घटनाक्रम से पर्दा उठाने के लिए दोबारा से इस मामले की जांच करवाई जाए.

बता दें कि भाजपा ने चुनाव के वक्त गुड़िया मामले को प्रमुख मुद्दा बनाया था। सीबीआई कोर्ट में चल रही कार्रवाई से एक के बाद एक कडियां खुल रही हैं. गुड़ियान्याय मंच शुरू से इस बात को कहता रहा है कि गुड़िया का बलात्कार व निर्मम हत्या किसी एक दरिंदे का कार्य नहीं था बल्कि यह एक सामूहिक सुनियोजित जघन्य अपराध था. इस अपराध में शामिल असली अपराधियों को राजनेताओं नौकरशाहों व प्रभावशाली व्यक्तियों का आश्रय रहा है. फोरेंसिक विभाग की जांच ने इस बात को पुख्ता कर दिया है कि गुडिया का बलात्कार व निर्मम हत्या कोई साधारण मामला नहीं था बल्कि यह सुनियोजित षडयंत्र था. इसमें कई लोगों की भूमिका थी जिनका बचाव करने की कोशिश राजनेताओं व पुलिस विभाग ने मिलकर की.पुलिस द्वारा पांच निर्दोषों को पकड़ना व बाद में उनमें से एक कि पुलिस हिरासत में हत्या करना भी असल दरिंदों से ध्यान भटकाने की कोशिश ही थी.

गौरतलब है कि 6 जुलाई 2017 को कोटखाई के महासू स्कूल की दसवीं की छात्रा का शव साथ में लगते दांदी जंगल में बरामद किया गया था. छात्रा दो दिन पहले स्कूल से रहस्यमयी हालात में गायब हो गई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या करने की पुष्टि हुई थी. इस मामले में आरंभिक जांच स्थानीय पुलिस ने की थी और बाद में इसकी जांच विशेष जांच दल को सौंपी गई थी. विशेष जांच दल ने इस मामले में एक नेपाली सूरज सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया था. इनमें से एक आरोपी सूरज की 18 जुलाई 2017 को कोटखाई थाना के लाॅकअप में हत्या कर दी गई. इस मामले को लेकर जमकर बबाल हुआ और लोग सड़कों पर उतर गए. प्रदर्शनकारियों ने कोटखाई थाने को आग के हवाले कर दिया था. प्रदेश हाईकोर्ट ने गुड़िया और सूरज हत्या मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए.

रोचक पहलू यह है कि सीबीआई ने एक आरोपी अनिल कुमार को गिरफतार कर गुड़िया मामले को सुलझाने का दावा किया है. अनिल कुमार को सीबीआई ने अप्रैल 2018 को गिरफ्तार किया था. सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि अनिल कुमार ने ही रेप के पश्चात गुड़िया की बर्बरता से हत्या की थी.