हिमाचल भू-स्खलन में कमी लाने के लिए कोर-ग्रुप का गठन किया जाएगा

हिमाचल भू-स्खलन में कमी लाने के लिए कोर-ग्रुप का गठन करेगा
प्रतीक चित्र

शिमला. अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व और लोक निर्माण मनीषा नन्दा की अध्यक्षता में भू-स्खलन में कमी लाने के लिए कोर-ग्रुप के सृजन और इस संबंध में राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण को भेजी, जाने वाली विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के लिए बैठक आयोजित की गई.

मनीषा नन्दा ने कहा कि भू-स्खलन राज्य में सबसे आम खतरा है, लगभग हर वर्ष राज्य एक अथवा इससे अधिक मुख्य भू-स्खलनों के कारण प्रभावित होता है, जिसमें मुख्य रुप से मकानों, खेतों, सड़कें तथा अधोसंरचना सहित जन-जीवन को नुकसान पहुंचता है. अधिकांश संवेदनशील भू-स्खलन स्थल राष्ट्रीय राजमार्गों के समीप हैं, जिनका रखरखाव भारत सरकार की ओर से किया जाता है.

उन्होंने कहा कि भूकंप तथा बाढ़ की तरह भू-स्खलन के जोखिम को संरचना तथा गैर संरचना उपायों के संयोजन से कम किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण ने राज्य से भू-स्खलन से निपटने के संबंध में एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट मांगी है. विभिन्न जिलों में भू-स्खलन की दृष्टि से संवेदनशील 21 स्थलों को चिन्हित किया गया है.

बैठक में राज्य के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक कोर-ग्रुप के गठन का निर्णय लिया गया, जिसके सदस्य सचिव लोक निर्माण के प्रमुख अभियन्ता होंगे.कोर-ग्रुप में भारतीय भू-विज्ञान सर्वेक्षण चण्डीगढ़ के निदेशक सदस्य होंगे तथा लोक निर्माण विभाग के अभियन्ता, उद्योग विभाग के भू-वैज्ञानिक तथा आईआईटी मण्डी के तकनीकी विशेषज्ञ भी इस कोर-ग्रुप के सदस्यों में शामिल होंगे.

राज्य लोक निर्माण विभाग भूस्खलन कम करने के लिए क्रियान्वयन एजेंसी होगी तथा भारतीय भू-विज्ञान सर्वेक्षण तथा राज्य भू-विज्ञान शाखा इसकी सहयोगी एजेंसियां होंगी. विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने तथा भू-स्खलन को कम करने के उपायों के लिए आईआईटी मण्डी तकनीकी सहयोग करेगी.

यह भी निर्णय लिया गया कि लोक निर्माण विभाग द्वारा नमूना विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए बिलासपुर जिला के नैना देवी से तथा सिरमौर जिला से एक-एक स्थल को चिन्हित किया जाएगा. लोक निर्माण विभाग प्रत्येक अंचल में चार से पांच संवेदनशील स्थलों की पहचान कर शीघ्र इसका उपचार करेगा.