हजारीबाग जेल में हत्यारोपी की मौत, परिजनों ने लगाया जेलर पर आरोप

हजारीबाग जेल में हत्यारोपी की मौत, परिजनों ने लगाया जेलर पर आरोप - Panchayat Times

धनबाद. एक हत्यारोपी के पिता देवनंदन नोनिया ने हजारीबाग जेल के जेलर पर अपने पुत्र योगेश कुमार चौहान की हत्या करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि जेलर ने पहले तो मेरे मानसिक रोगी पुत्र का इलाज नहीं कराया. इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई. योगेश की आंख हाथ के अलावे शरीर के कई भाग मे चोट के निशान हैं.जो उसकी हत्या की ओर इंगित कर रहा है. कहा कि पुत्र की हत्या के मामले में जेलर के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे.

हजारीबाग जेल में हत्यारोपी की मौत, परिजनों ने लगाया जेलर पर आरोप - Panchayat Times

देवनंदन का आरोप है कि  बस्ताकोला के मोहम्मद तनवीर कि हत्या के 3 साल पूर्व से योगेश मानसिक रूप से बीमार था. उसका इलाज रांची से कराया जा रहा था. घटना के बाद धनबाद जेल से ही 2017 को इलाज के लिए रांची भेजा गया था. 16 नवंबर 2017 को धनबाद जिला न्यायालय ने उसके पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुना दी. इसके बाद उसे हजारीबाग जेल में रखा गया. हजारीबाग जेल में 2017 मे ही उसका इलाज कराया गया. इसके बाद उसका इलाज में कोताही बरती जाने लगी. जिस कारण उसका मानसिक स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती चली गई.

दिसंबर 2019 में जब अपने पुत्र योगेश से मिलने जेल में गया तो उसने बताया कि उसका इलाज नहीं किया जा रहा है. जिसके कारण उसका दिमाग ठीक से काम नहीं कर रहा है. इसके बाद देवनंदन ने जेलर से मिलने की इच्छा जताई, पर जेलर मिलने से इंकार कर दी.

देवनंदन ने अपने पुत्र के इलाज के लिए 23 दिसंबर 2019 को धनबाद से आरटीआई के तहत इलाज की जानकारी मांगी, पर उसका जवाब नहीं मिला. इसके बाद देवनंदन व उसकी पत्नी सरस्वती देवी जेल मे योगेश से मिलने 8 जनवरी 2020 को गए. इसके बाद योगेश ने इलाज ना होने के बात बताई.

हजारीबाग जेल में हत्यारोपी की मौत, परिजनों ने लगाया जेलर पर आरोप - Panchayat Times

इसके बाद देवनंदन ने फिर 9 जनवरी को इलाज की जानकारी आरटीआई के माध्यम से जेलर से मांगा, पर उसे जवाब नहीं मिला. देवनंदन का आरोप है कि जेलर ने एक तो मेरे बेटे का इलाज में कोताही बरती, ऊपर से आरटीआई के तहत जवाब भी नहीं दी. उसने आरटीआई का उल्लंघन किया है.

कहा की जेल में कैदियों के लिए सारी व्यवस्था रहती है. पर मेरा पुत्र मेडिकल विभाग में आत्महत्या कैसे कर ली.उसके शरीर पर चोट के निशान कैसे आ गए. इस पर एक सवाल खड़ा होता है. फिलहाल बेटे की इंसाफ के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे.

16 नवंबर 2017 को हुई थी आजीवन कारावास की सजा

7 फरवरी 2014 को बस्ताकोला निवासी चिकित्सक एम एस खान के पुत्र तनवीर ऐना मस्जिद मे नमाज पढ़ने जा रहा था. बस्ताकोला शिव मंदिर के पास योगेश कुमार चौहान ने भुजाली से प्रहार कर तसवीर की हत्या कर दी थी. इस मामले में धनबाद जिला न्यायालय ने 16 नवंबर 2017 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.  इसके बाद उसे हजारीबाग जेल में शिफ्ट कर दिया गया. हत्यारोपी योगेश के पिता देवनंदन ने अपने पुत्र को छुड़ाने के लिए उच्च न्यायालय रांची में आवेदन किया था.

शव पहुंचते ही योगेश के घर बस्ताकोला नोनिया पट्टी में मातम पसर गया. उसकी मां सरस्वती देवी रोते हुए इसका जिम्मेवार जेलर को ठहरा रही थी. बुधवार के करीब दस बजे झरिया पुलिस ने योगेश की आत्महत्या करने की सूचना देवनंदन को घर आकर दी थी.