बीवी म्यांमार में खाना पकाए, पति भारत में आराम फरमाए

नागालैंड राज्य के मोन जिले में बसा है लोंगवा गांव. यह गांव भारत और म्यांमार

नई दिल्ली. सरहदें इंसानों ने बनाई है, जिसे लेकर दुनिया अक्सर लड़ते हुए दिखाई देती है. वहीं एक जगह ऐसी भी है जहां सरहदें मायने नहीं रखती. भारत और म्यांमार के बीच एक छोटी सी बस्ती बसी है. जहां रहने वाले लोग भारत के भी उतने ही हैं और म्यांमार के भी, क्योंकि यहां रहने वाले लोगों के पास दोनों ही देशों की नागरिकता है. भारत के उत्तर-पूर्व सीमा पर नागालैंड राज्य के मोन जिले में बसा है लोंगवा गांव. यह गांव भारत और म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा में बसा हुआ है. यानी आधा भारत में है और आधा म्यांमार में पड़ता है.

लोंगवा गांव. यह गांव भारत और म्यांमार

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लोंगवा गांव मे घर कुछ ऐसे बने हुए हैं कि परिवार के लोगों का खाना तो म्यांमार में बनता है, वहीं घर के लोग भारत में आराम कर रहे होते हैं. मतलब किचन तो म्यांमार है वहीं, बेडरूम भारत में है, दुनिया में ऐसी मिसाल कम ही देखने को मिलती है.

  इस गांव के मुखिया का एक बेटा म्यांमार की सेना में सैनिक है, वहीं गांव के कई लोग भारत में रोजगार करते हैं. सबसे अच्छी बात ये है कि यहां देश के नाम को लेकर टकराव और तनाव नहीं है. गांव के लोग बेहद शालीन स्वभाव के हैं और दोनों देशों से प्यार करते हैं. कहीं न कहीं ये गांव पूरी दुनिया को अमन और चैन का संदेश दे रहा है. सही तो है सरहदें कड़वाहट के लिए नहीं, बल्कि अमन और शांति के लिए होनी चाहिए.

लोंगवा गांव. यह गांव भारत और म्यांमार