पढ़िए ‘संकल्प राष्ट्र निर्माण का’, प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’

एक पुस्तक लिखी है जिसका नाम है ‘संकल्प राष्ट्र निर्माण का.' - Panchayat Times

नई दिल्ली. तीन अक्टूबर, 2014 की वो तारीख जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार देशवासियों के साथ ‘मन की बात’ कार्यक्रम करते हैं. भारत में ऐसा प्रयोग पहले किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया था. यही कारण है कि इस कार्यक्रम की चारों तरफ चर्चा और तारीफ हुई. इसी से प्रेरित होकर लेखक डॉ. वेदप्रकाश ने एक पुस्तक लिखी है जिसका नाम है ‘संकल्प राष्ट्र निर्माण का.’ इस किताब में सिलसिलेवार तरीके से प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है. दिल्ली में इस किताब पर चर्चा रविवार को आरडब्ल्यूए पॉकेट-सी सरिता विहार में ‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम के जरिए की गई. जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि भी दी गई.

 एक पुस्तक लिखी है जिसका नाम है ‘संकल्प राष्ट्र निर्माण का.' - Panchayat Times

किताब के लेखक डॉ. वेदप्रकाश ने बताया कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम सीधे अपने देशवासियों से जुड़ जाते हैं, और वो सबकुछ कह देते हैं जो व्यस्त जीवन में कहीं छूट जाता था. पीएम सीधे जनता से संवाद स्थापित करते हैं, जिसका बेहद गहरा प्रभाव पड़ा है. वो आगे कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने कई महत्वपूर्ण मुद्दे और सवाल देश के सामने इन कार्यक्रमों के माध्यम से रखे हैं. पीएम न सिर्फ सवाल पूछते हैं बल्कि उन गंभीर सवालों का सरल तरीके से जवाब तलाशने की कोशिश भी करते हैं. अगर पीएम कहते हैं कि बेटी बचाओ तो ‘मन की बात’ के जरिए वो बताते भी हैं कि ऐसा क्यों करें.

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लेखक के अनुसार ‘मन की बात’ के जरिए प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्र निर्माण करना चाहते हैं. कभी-कभी पीएम एक मनोवैज्ञानिक भी बन जाते हैं और जनता से कहते हैं कि आजकल आप वर्ल्ड कप देख रहे होंगे, तो आपको ऐसा लग रहा होगा…..आदि. पीएम ने जो ये बीड़ा उठाया है वो बेहद सराहनीय कदम है. जब हमने लेखक से पूछा कि आपको ‘संकल्प राष्ट्र निर्माण का’ किताब लिखने का विचार कैसे आया तो उन्होंने कहा कि “मैने यह किताब इसलिए लिखी क्योंकि कई ऐसे लोग हैं जो रेडियो नहीं सुनते, वो किताब पढ़ते हैं और प्रधानमंत्री के मन की बात से वो महरूम भला क्यों रहे.”