द लैंसेट के मुताबिक झारखंड़ में कोरोना का खतरा मध्य प्रदेश, बिहार और तेलंगाना के बाद सबसे ज्यादा, जानिए राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति

द लैंसेट के मुताबिक झारखंड़ में कोरोना का खतरा मध्य प्रदेश, बिहार और तेलंगाना के बाद सबसे ज्यादा, जानिए राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति - Panchayat Times
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रांची/नई दिल्ली. ग्लोबल मेडिकल जर्नल (द लैंसेट) के एक अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि झारखंड में कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ने का खतरा मध्य प्रदेश, बिहार और तेलंगाना के बाद सबसे अधिक है.

यह अध्ययन राज्यों में उपलब्ध मेडिकल सुविधाओं, वहां के स्वास्थ्य सूचकांकों, सामाजिक-आर्थिक हालात, शिक्षा, जनसंख्या में आयुवर्ग अनुपात, घरों की सघनता तथा साफ-सफाई के आधार पर किया गया है.

जर्नल ने इन आधारों पर कोरोना के संक्रमण के खतरे को लेकर भारत के राज्यों की रैंकिंग की है. इसमें झारखंड सबसे अधिक जोखिम वाले राज्यों में चौथे स्थान पर है.

देवघर जिले को कोरोना संक्रमण के अधिक खतरों वाले भारत के 20 जिलों में शामिल

इस अध्ययन में झारखंड के एक जिला देवघर को कोरोना संक्रमण के अधिक खतरों वाले भारत के 20 जिलों में शामिल किया है. यह जिला दसवें स्थान पर है. देवघर का कुल सूचकांक 0.986 आया है.

जो देश के सबसे अधिक खतरे वाले जिले बिहार के दरभंगा के सूचकांक एक के करीब है. देवघर में भी झारखंड की तरह मेडिकल सुविधाओं की कमी, स्वच्छता का अभाव, सामाजिक-आर्थिक हालातों के कारण संक्रमण बढऩे का जोखिम अधिक है.

ज्यादा लोगों वाले आवास, शौचालय कम होने से भी संक्रमण बढऩे का खतरा

झारखंड की बात करें तो आर्थिक-सामाजिक स्थिति, निवास एवं स्वच्छता तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता में खतरनाक जोखिम वाले राज्यों में शामिल है. ज्यादा लोगों वाले आवास, शौचालय कम होने और हाथ साफ करने की सही व्यवस्था नहीं होने से भी संक्रमण बढऩे का खतरा यहां अधिक बताया गया है. वहीं 60 वर्ष से अधिक उम्र वर्ग की आबादी, शहरी आबादी का घनत्व कम होने के कारण झारखंड बेहतर स्थिति में है.

प्रति एक लाख आबादी पर उपलब्ध अस्पताल, अस्पताल से दूर आबादी का अनुपात, डॉक्टरों की उपलब्धता तथा अन्य सूचकांकों को देखा गया

स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता में प्रति एक लाख आबादी पर उपलब्ध अस्पताल, अस्पताल से दूर आबादी का अनुपात, डॉक्टरों की उपलब्धता तथा अन्य सूचकांकों को देखा गया है. 40 से 54 वर्ष के पुरुषों और 40-49 वर्ष की महिलाओं, जिन्हें दिल की बीमारी, डायबिटीज, दमा और कैंसर का खतरा है तथा ऐसे लोगों का अनुपात जो नशा करते हैं एवं 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों की स्थिति को जोखिम मानकर भी अध्ययन किया गया. इसमें झारखंड की हालत उतनी खराब नहीं है.

झारखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति

स्वास्थ्य केंद्रजरूरत   उपलब्धकमी % में
स्वास्थ्य उपकेंद्र6768384843%
प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र107929872%
सामुदायिक स्वास्थ्य उपकेंद्र26917136%
  1. झारखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के 667 पद स्वीकृत हैं लेकिन 336 उपलब्ध हैं.
  2. 684 विशेषज्ञ चिकित्सक चाहिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लेकिन उपलब्ध महज 66 हैं.
  3. 469 फार्मासिस्ट की जरूरत है प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में लेकिन उपलब्ध 241 ही हैं.
  4. वहीं 469 लैब तकनीशियन और 2799 नर्सिंग स्टाफ चाहिए लेकिन उपलब्ध महज क्रमश 264 और 1190 ही हैं.

संक्रमण बढ़ने का इंडेक्स के मुताबिक इस पैमाने पर खड़ा है झारखंड

ओवर ऑल          0.914
सामाजिक-आर्थिक हालात0.857
जनसांख्यिकी0.371
निवास एवं स्वच्छता0.943
स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता0.943
महामारी प्रसार के कारण0.200

जोखिम वाले दस राज्यों की यह है स्थिति

रैंकिंग  राज्यइंडेक्स
 1मध्य प्रदेश1.000
 2बिहार0.971
 3तेलंगाना0.943
 4झारखंड0.914
 5उत्तर प्रदेश0.886
 6बंगाल0.829
 7महाराष्ट्र0.829
 8ओडिशा0.800
 9गुजरात0.771
 10आंध्र प्रदेश0.714
जोखिम वाले दस राज्यों की स्थिति