एजी की रिपोर्ट में सामने आया झारक्राफ्ट के 13 करोड़ का फर्जीवाड़ा

रांची. महालेखाकार (एजी) ने झारक्राफ्ट में 18 लाख किलो से अधिक ऊन के फर्जीवाड़े का पता चला है. एजी की जांच में पानीपत से 18.81 लाख किलो का धागा मंगवाने का दावा फर्जी पाया गया है. मालूम हो कि गरीबों के लिए कंबल बनाने के लिए ऊनी धागा मंगवाने की बात कही गई थी. महालेखाकार ने अपनी जांच रिपोर्ट में 318 ट्रिप को फर्जी पाया है. ऊन की कुल कीमत 13.63 करोड़ रुपए आंका गया है.
एजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑडिट के दौरान झारक्राफ्ट ने पानीपत से 19.93 लाख किलो ऊनी धागा ट्रकों के सहारे अपने कलस्टरों तक पहुंचाने का दावा किया. इसके लिए सिर्फ ट्रांसपोर्ट के चालान का सहारा लिया.
पानीपत से धागा लेकर चलने के बाद अधिकतम तीन दिनों में ट्रकों को एनएच-टू के टोल प्लाजा से गुजर जाना चाहिए. पर इस अवधि में 318 ट्रिप से जुड़े ट्रकों ने टोल प्लाजा क्राॅस ही नहीं किया. सिर्फ दो ट्रिप से जुड़े ट्रक ही टोल प्लाजा से गुजरे.
झारक्राफ्ट की ओर से दिए गए आंकड़ो का मिलान टोल प्लाजा से करने पर मात्र 12000 किलो ऊन के परिवहन का ही पता चल पाया है.

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