नई दिल्ली. बढ़ते वित्तीय संकट से जूझ रही हिमाचल प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सभी बोर्ड, निगम और आयोगों के चेयरमैन, वाइस-चेयरमैन और सलाहकारों से कैबिनेट रैंक का दर्जा तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। यह फैसला मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने लागत में कटौती के तहत लिया है।
खर्च कम करने के लिए सख्त कदम
सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने कैबिनेट रैंक से जुड़े सभी लाभ भी समाप्त कर दिए हैं। इसमें सरकारी वाहन, पुलिस प्रोटोकॉल और अन्य सुविधाएं शामिल हैं।
इसके अलावा, इन पदाधिकारियों के वेतन और भत्तों में 30 सितंबर 2026 तक 20% की कटौती/स्थगन करने का भी आदेश दिया गया है। इस फैसले से करीब 50 अधिकारी प्रभावित होंगे, जिनमें छह प्रमुख सलाहकार भी शामिल हैं।
राजस्व घाटा बढ़ने से लिया गया फैसला
यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब राज्य को रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने के कारण हर साल लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह कदम “आत्मनिर्भर हिमाचल” की दिशा में उठाया गया है। जानकारी के मुताबिक, एक कैबिनेट रैंक अधिकारी पर हर महीने करीब 2.5 से 3 लाख रुपये तक का खर्च आता था।
बढ़ते कर्ज से जूझ रही सरकार
हिमाचल प्रदेश पर इस समय कुल कर्ज 80,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। स्थिति और गंभीर तब हुई जब 15th Finance Commission की सिफारिशों के बाद RDG को बंद कर दिया गया।
अन्य योजनाओं पर भी दबाव
राज्य सरकार पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने और महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये भत्ता देने का भी वित्तीय दबाव है।
सरकार का मानना है कि इस तरह के फैसलों से वित्तीय अनुशासन कायम रखने में मदद मिलेगी और यह संदेश जाएगा कि आर्थिक बोझ को कम करने में राजनीतिक वर्ग भी भागीदारी कर रहा है।
