कोरोना संकट के बीच हिमाचल में सेब सीजन का आगाज

शिमला में सेब से लटा ट्रक दुर्घटनाग्रस्त, चालक की मौत - Panchayat Times

शिमला. कोरोना संकट के बीच हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन का आधिकारिक तौर पर बुधवार को आगाज हुआ. राज्य की 4000 की सेब आर्थिकी पर मौसम की मार के बाद मजदूरों का संकट खड़ा हो गया है. कोरोना संकट के चलते मजदूर अपने घर लौट चुके है,ऐसे में अब सेब सीजन शुरू होते ही बागवानों को मजदूरों की कमी खलने लग गई है सेब सीजन में मजदूरों का टोटा बागवानों के लिए मुसीबत बन रहा है, क्योकि हिमाचल में सेब सीजन शुरू हो गया है और अर्ली वैरायटी के रसीले सेब मंडियों में पहुंचने लगे हैं. 

अर्ली वैरायटी का सेब टाइडमैन अमूमन जुलाई के दूसरे सप्ताह में बिकने के लिए पहुंचता था, लेकिन इस बार समय से पहले ही ये मार्किट में आने लग गया है. बागवानों को बगीचों से सेब तोडने से लेकर मंडी पहुंचाने तक के लिए मजदूर नही मिल रहे है. नेपाली मजदूर न होने के कारण बागवानो को खुद ही सेब तो तोडना पड़ ही रहा है साथ में सेब की पेटिया भरने के लिए भी मजदूर नहीं मिल रहे है. यंहा तक की सेब गे्रडिग पैकिंग की मशीनो पर भी मजदूर न होने के चलते बागवानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. 


सीजन में मजदूरों की कमी बागवानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर सकती है, हालांकि सरकार की तरफ से बागवानों को आश्वासन दिया गया है कि वक्त रहते मजदूरों का बंदोबस्त हो जाएगा. सेब सीजन की दस्तक के साथ प्रशासन भी तैयारियों का दावा कर रहा है,लेकिन अभी तक मजदूरो का बंदोबस्त नही हो पाया है. वहीं इस बार सेब सीजन पर भी कोरोना का साया पड़ना लाजमी है, चूंकि आने वाले दिनों में मंडियों में उमड़ने वाली भीड़ का अंदाजा अभी से लोगों को सता रहा है.

भले ही सोशल डिस्टेसिंग से लेकर मास्क के इस्तेमाल तक के आदेश तो प्रशासन ने दिए हैं पर सेब सीजन में इन आदेशों की पालना कराना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है.  बागवानों पर साथ ही पेट्रोल और डीजल के बढ़े दामो की मार भी पड़ रही है. प्रशासन के आदेशो के बिना ही ट्रक और पिकअप चालको ने किराया अधिक वसूलना शुरू कर दिया है. वही किराया बढने के आसार लगातार बने हुए हैं जिसका बोझ बागवानों और आम जनता पर पड़ने वाला है.

देखा जाए तो इस बार हिमाचल का सेब सीजन कई चुनौतियों के साथ आया है. कोरोना के साये में बागवानों की अपनी चिंताएं और सरकार की अपनी, क्योंकि दोनों की आर्थिकी इसी सेब पर टिकी है, ऐसे में देखना ये होगा कि सरकार आने वाले दिनों में बागवानों की इस समस्या का कैसे समाधान करती है जबकि कोरोना बीमारी का खतरा अभी लगातार बना हुआ है.


उल्लेखनीय है कि हिमाचल में सेब सीजन शुरू होते ही अर्ली वैरायटी के रसीले सेब मंडियों में पहुंचने लगे हैं. सेब को मंडी पहुंचते ही अच्छे दाम भी मिल रहे हैं.  बागवान भी अच्छे दाम मिलने से खुश हैं. वहीं, सेब के साथ-साथ नाशपाती के भी अच्छे दाम मिल रहे हैं. नाशपाती हॉफ रेड किस्म की नाशपाती रिकॉर्ड 3000 रुपये प्रति पेटी की दर से बिक रही है. अर्ली वैरायटी का सेब मंडी पहुंच चुका है और अगले एक सप्ताह में अपर हिमाचल का सेब भी मंडियों में दस्तक दे सकता है.