अरसयानी कुल्लू और प्रेम कुल्लू दो आदिवासी जो आसपास के इलाकों के लिए बने हुए है मिसाल

अरसयानी कुल्लू और प्रेम कुल्लू दो आदिवासी जो आसपास के इलाकों के लिए बने हुए है मिसाल - Panchayat Times

खूंटी. ये हैं अरसयानी कुल्लू और प्रेम कुल्लू. अरसयानी कुल्लू और प्रेम कुल्लू आसपास के इलाकों के लिए मिसाल बन गए हैं. आजकल इनको देखकर आसपास के लोग भी अंडा उत्पादन के क्षेत्र में आगे आना चाह रहे हैं. यह सब संभव हो सका झारखण्ड ट्राइबल डेवलोपमेन्ट सोसाइटी और प्रदान गैर सरकारी संस्था के सहयोग से. 

झारखण्ड ट्राइबल डेवलोपमेन्ट सोसाइटी लगातार सिमडेगा जिले में किसानों की आय दुगुनी करने को लेकर बेहतर कार्यंकर रही है. साथ ही प्रदान द्वारा किसानों को टेक्निकल सहायता और प्रशिक्षण की मदद से विकास के रास्ते आगे बढ़ाने का काम कर रही है.

अरसयानी कुल्लू और प्रेम कुल्लू दोनों सिमडेगा जिले के सेवई पंचायत के सनसेवई चोयताटोली के निवासी हैं. सरकार के महत्वकांक्षी योजना झारखण्ड ट्राइबल डेवलोपमेन्ट सोसाइटी के तहत इन्हें मुर्गी शेड निर्माण के लिए डीबीटी के माध्यम से सहयोग राशि दी गयी. मुर्गी शेड में इन्होंने अंडा उत्पादन वाले दस पंद्रह मुर्गियों का पालन किया और देखते ही देखते लगातार 100, 200, 300 अंडा का उत्पादन होने लगा. अब तक अरसयानी कुल्लू ने 45 हजार का अंडा बेचा, वहीं प्रेम कुल्लू ने भी तीस पैंतीस हजार की आमदनी कर ली.

जेटीडीएस के सहयोग से इन्हें अंडा देने वाले मुर्गी पालन का कार्य दिया गया. प्रदान ने इन्हें प्रशिक्षण दिया कि मुर्गी का रखरखाव और इसके विस्तार के लिए कैसे काम करना है. टेक्निकल सपोर्ट और और चूजा मिलने से दोनों किसान मुर्गियों का रखरखाव बेहतर तरीके से करने लगे मुर्गियों का दाना उनकी बीमारी में उनका सेवन उपचार समेत सभी बारीकियों पर ध्यान देते हुए यह मुर्गी पालन में काफी आगे बढ़ गए हैं.

एक मुर्गी शेड से ही मुर्गी इन्हें 40 से 45 हजार की आमदनी हो गई है. अब बाजार में जैसे ही इनके द्वारा अंडा पहुंचता है लोग बाजार के अन्य  अंडों को छोड़कर इनके यहां अंडा लेने पहुंच जाते हैं इससे इन्हें बाजार में बहुत देर रुकना नहीं पड़ता और कम समय में ही ये 200-300 अंडे बेच लेते हैं महिला किसान अरसयानी का कहना है कि अंडा बेचकर ही यह अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ा रहे हैं कोई भी बच्चा सरकारी स्कूल नहीं जाता.

सभी अच्छे स्कूलों में पढ़कर आगे और बेहतर करना चाहते है.  साथ ही समेकित कृषि के द्वारा भी इन्हें अच्छी खासी कमाई हो जाती है. इन्होंने हरा चारा अजोला का भी उत्पादन आरंभ कर दिया है. अजोला हरा चारा पशुओं के लिए काफी हेल्थी फ़ूड के रूप में काम जाना जाता है.

प्रेम ने बताया कि अब आसपास के गांव के अन्य लोग भी अंडा मुर्गी पालन का काम स्वयं करना चाहते हैं और अन्य लोग भी इन्हें देख कर प्रोत्साहित होकर सरकार से मुर्गी शेड का निर्माण के आवेदन भी जमा कर दिए हैं उम्मीद है आने वाले समय में सिमडेगा जिले के अन्य पंचायत के लोग भी अंडे का उत्पादन बड़े पैमाने पर करेंगे.