राजस्थान में फिर ठगी गईं महिलाएं

राजस्थान में फिर ठगी गईं महिलाएं
राजस्थान की एक चुनावी रैली में महिला कांग्रेस की नेताओं के साथ राहुल गांधी

जयपुर. राजनीति में महिलाओं को लिए आरक्षण क्यों जरुरी है इसकी बानगी देखनी हो तो आज जयपुर के राजभवन में अशोक गहलोत सरकार में शपथ लेने वाले 23 मंत्रियों की सूची को देख लीजिए. इस मंत्रीपरिषद में मात्र एक महिला को राज्यमंत्री की शपथ दिलाई गई है. सिकराय से कांग्रेस विधायक ममता भूपेश ने अशोक गहलोत की सरकार में राज्यमंत्री के रूप में शामिल हुईं.

ममता भूपेश

यह हाल तब है जब राजस्थान विधानसभा की कुल 199 सीटों पर हुए चुनाव में 22 महिलाएं चुनाव जीतकर आई हैं, जिसमें से कांग्रेस के टिकट पर 11 महिलाएं विधायक बनी हैं. हालांकि यह आंकड़ा बहुत ज्यादा नहीं है फिर भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मंत्रिमंडल में महिलाओं को जो हिस्सेदारी मिलनी चाहिए थी वह भी नहीं मिली.

यह भी पढ़ें: विधानसभा चुनाव में कहां खड़ी हैं राजस्थान की महिलाएं

माना जा रहा है कि इस बार राजस्थान के मंत्रियों के चयन में क्षेत्रीय राजनीति और जातिगत फैक्टर का भी पूरा ध्यान रखकर मंत्रिमंडल का गठन किया गया है लेकिन महिलाओं के मामले में यह ध्यान यह संतुलन नहीं दिख रहा है.

महिलाओं ने किया था अधिक मतदान

इस बार राजस्थान विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाते हुए उन्हें पीछे छोड़ दिया था. प्रदेश में इस बार कुल 74.21 प्रतिशत मतदान हुआ. इसमें पुरुषों का प्रतिशत 73.80 तथा महिलाओं का प्रतिशत 74.66 रहा. यानि, नए विधायक चुनने के लिए प्रदेश के 33 जिलों में 0.86 फीसदी महिलाओं के कदम मतदान केन्द्रों पर ज्यादा पड़े थे.

पिछली बार से कम महिलाएं चुनी गईं विधायक

राजस्थान में इस बार अपेक्षाकृत कम संख्या में ही महिलाएं विधायक बन पाई हैं. कुल मिलाकर यह आंकड़ा 22 रहा है जबकि 2013 में 28 महिलाएं विधायक के रूप में विधानसभा पहुंची थीं.

15वीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव में जहां कांग्रेस ने 27 महिलाओं को टिकट दिया वहीं भाजपा ने 23 महिलाओं को अपना उम्मीदवार बनाया. इनमें से कांग्रेस की 11 और भाजपा की 10 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है.

यह भी पढ़ें: राजस्थान विधानसभा चुनाव में पुरुषों से अधिक महिलाओं ने किया मतदान

राज्य में 199 सीटों के लिए हुए चुनाव में 187 महिला प्रत्याशियों ने चुनावी समर में अपना भाग्य आजमाया लेकिन इनमें से सिर्फ 22 महिलाओं ने जीत हासिल की जो पिछले चुनाव से छह कम है. वहीं 2013 के चुनाव में 166 महिलाओं में से 28 महिलाओं ने जीत दर्ज की थीं.

राजस्थान के चुनावी पिच पर एथलीट कृष्णा पूनिया आजमा रही भाग्य
सादुलपुर से चुनी गईं विधायक कृष्णा पूनिया

कांग्रेस ने कुल 27 महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा था. अलवर जिले की रामगढ सीट पर प्रत्याशी के निधन के कारण स्थगित किया गया है जहां कांग्रेस की महिला प्रत्याशी थी. इस कारण कांग्रेस की 26 महिला प्रत्याशियों में से 11 महिलाएं जीत का परचम फहरा सकी. पहली बार मेडता से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की महिला उम्मीदवार इंद्रा देवी चुनी गई हैं.

भाजपा से झालरापाटन से वसुंधरा राजे, अजमेर उत्तर से अनिता भदेल, अनूपगढ से संतोष बावरी, बीकानेर पूर्व से सिद्वि कुमारी, धौलपुर से शोभारानी कुशवाह, केशोरायपाटन से चंद्र कांता मेघवाल, लाडपुरा से कल्पना देवी, राजसमंद से किरण माहेश्वरी, सोजत से शोभा चौहान और सूरसागर से सूर्यकांता व्यास विधायक चुनी गईं.

ओसिंया से चुनी गईं विधायक दिव्या मदेरणा

कांग्रेस से बामनवास से इंद्रा मीणा, बगरू से गंगादेवी, बानसूर से शकुंतला रावत, जायल से मंजू देवी, जोधपुर से मनीषा पंवार, कामां से जाहिदा खान, किशनगंज से निर्मला सहरिया, ओसिंया से दिव्या मदेरणा, सादुलपुर से कृष्णा पूनिया, शेरगढ से मीना कंवर और सिकराय से ममता भूपेश विधायक बनी.