विधानसभा आम चुनाव-2018: पम्पलेट-पोस्टर पर प्रकाशक का नाम-पता लिखना जरूरी

विधानसभा आम चुनाव-2018: पम्पलेट-पोस्टर पर प्रकाशक का नाम-पता लिखना जरूरी

जयपुर. जिला कलक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी सिद्धार्थ महाजन ने विधानसभा आम चुनाव के दौरान निर्वाचक पम्पलेट एवं पोस्टर इत्यादि के मुद्रण पर नियंत्रण के लिए जिले में स्थित मुद्रक, मुद्रणालयों एवं समाचार पत्रों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं. महाजन ने बताया कि विधानसभा चुनाव से संबंधित प्रकाशित-मुद्रित कराए जाने वाले सभी प्रकार के निर्वाचन पैम्फलेट, पोस्टर या ऎसी अन्य सामग्री पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 127-क के अनुसार उसके मुद्रक और प्रकाशक का नाम-पता स्पष्ट लिखना जरूरी होगा.

उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति किसी निर्वाचक पैम्पलेट या पोस्टर का मुद्रण तब तक नही करा सकेगा जब तक प्रकाशक के पहचान की घोषणा उसके द्वारा हस्ताक्षरित और दो व्यक्तियों द्वारा सत्यापित कर दो प्रतियों में मुद्रक को नही दे दी जाती है. मुद्रण से पूर्व प्रकाशक से घोषणा प्राप्त करनी होगी. मुद्रित सामग्री की चार प्रतियां, घोषणा पत्र, मुद्रित दस्तावेजों की प्रतियों की संख्या और कीमत से संबंधित सूचना जिला मजिस्ट्रेट को निर्धारित तिथि के भीतर प्रस्तुत करनी होगी.

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि इन निर्देशों का किसी भी प्रकार से उल्लंघन या अतिक्रमण करने पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी. इसमें कारावास एवं जुर्माने या दोनों से दण्डित किया जा सकता है. कारावास को छह माह तक या जुर्माने को दो हजार रुपए तक बढ़ाया जा सकता है. साथ ही मुद्रणालयों के अनुज्ञा पत्र को समाप्त करने की कार्यवाही भी शामिल है. उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के 24 अगस्त, 2004 के आदेश तथा निर्वाचन विभाग राजस्थान के आदेश के अनुसार यह सभी प्रावधान प्रिन्ट मीडिया-समाचार पत्रों में प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों पर भी लागू होंगे.

बिना सर्टिफिकेशन के टेलीफोन-मोबाइल पर भी विज्ञापन प्रसारित नहीं जा सकेगा

अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. जोगाराम ने कहा कि बिना सक्षम समिति के अधिप्रमाणन के कोई भी विज्ञापन फोन, एसएमएस, रिंग टोन अथवा कॉलर टोन की श्रेणी में जारी नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कोई भी संस्था, दल या व्यक्ति ऎसा करता है तो वह उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अवहेलना की श्रेणी में शामिल होगा और ऐसे प्रसारित विज्ञापनों के विरूद्ध नियमानुसार कानूनी कार्यवही की जाएगी.

डॉ. जोगाराम नेमुख्य महाप्रबंधक, भारत संचार निगम लिमिटेड, रिलायन्स टेलीकम्यूनिकेशन, टाटा इण्डिकॉम, वोडाफोन, एयरटेल और एयरसेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को पत्र लिखकर इस बारे में निर्देशित किया है. उन्होंने कहा कि इस संबध में पूर्व में 25 सितंबर को सम्पन्न बैठक में व्यापक दिशा-निर्देश दिए थे्

अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि कुछ जगह से यह शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि टेलीफोन, मोबाइल फोन के द्वारा ऐसे विज्ञापन आम जनता के मध्य में प्रसारित किए जा रहे हैं. रिंगटोन-कॉलर टोन के द्वारा भी कुछ लोग अपना प्रचार-प्रसार कर रहे हैं. इस सम्बन्ध में भारत निर्वाचन आयोग के 15 अप्रैल, 2004 को निर्देश जारी किए थे, जिसके अनुसार कोई भी राजनैतिक दल, स्वयं सेवी संस्था अथवा व्यक्ति बिना सक्षम स्तर से अधिप्रमाणित किए ऎसे विज्ञापन जारी नहीं कर सकते हैं.

उन्होंने निर्देशित किया है इस प्रकार के बिना अधिप्रमाणित किये हुए विज्ञापनों पर तुरन्त रोक लगाई जाए और सक्षम स्तर से अधिप्रमाणन प्रमाण पत्र की प्रति प्राप्त होने के बाद ही विज्ञापन प्रसारित कराएं. साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि किसी अन्य राज्य के माध्यम से टेलीफोन व मोबाइल फोन पर प्रसारित होने वाले विज्ञापन राजस्थान राज्य की सीमा में बिना अधिप्रमाणन के प्रसारित नहीं होने पाएं.