जिसे मां ‘अटल्ला’ कहकर पुकारती थी, उसका हिमाचल से गहरा नाता…

अटल बिहारी वाजपेयी सक्रिय राजनीतिक छोड़ने के बाद हिमाचल प्रदेश

शिमला. बहुत कम लोग जानते होंगे कि सब दिल अजीज, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जब स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय राजनीतिक से दूर दूर होने के बाद बाद हिमाचल प्रदेश में ही अधिक रहते थे. उन्होंने कुल्लू के प्रीणी को अपना घर बनाया, जहां ज्यादातर समय वो रहना पसंद करते थे.

वैसे तो अटल बिहारी ने कई सारी कविताएं लिखी हैं, वहीं वो यहां के सौंदर्य के भी मुरीद हो गए थे. बर्फ से लदी पहाड़ियों पर भी वह कविताएं लिखने से बच नहीं पाए. यहां के लोग एक दिलचस्प बात को आज भी याद करते हैं. जब शाइनिंग इंडिया अभियान असफल हो गया था. उसके बाद वाजपेयी मनाली के प्रीणी स्थित अपने घर आए, तो हमेशा की तरह स्कूली बच्चों से मिले. बच्चों ने कुछ मांगें उनके समक्षी रखीं. जिसके बाद वाजपेयी ने 15 हजार रुपए ये कहते हुए दिए कि अभी इतने ही हैं, क्योंकि हाल में ही तुम्हारे ‘मामा’ की नौकरी चली गई है.

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वैसे तो वाजपेयी का नाता मनाली से पहले से ही था लेकिन बेटी की शादी होने के बाद ये रिश्ता और मजबूत हुआ. उनके दामाद रंजन भट्टाचार्य हिमाचली हैं क्योंकि रंजन के माता-पिता डॉक्टर होने के कारण कई साल हिमाचल में रहे. उनके पास बोनाफाइड हिमाचली प्रमाणपत्र था. रंजन जिस होटल श्रृंखला में काम करते थे, उसका बड़ा होटल मनाली में है. इसी होटल के साथ प्रीणी वाला घर रंजन का है. यहीं, वाजपेयी छुट्टियां मनाने आते थे.