सरकार किसी की भी हो आदिवासियों का कल्याण जरूरी: बाबुलाल मरांडी

आदिवासी बुद्धिजीवी विचार मंच के एक दिवसीय सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री बाबुलाल
प्रतीक चित्र

दुमका. आदिवासी बुद्धिजीवी विचार मंच के एक दिवसीय सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री बाबुलाल मरांडी दुमका के इंडोर स्टेडियम पहुंचे. सम्मेलन में उन्होंने सबसे पहले जमीन और आबरू की सुरक्षा पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि वो औद्योगिक कल-कारखाने का विरोधी नहीं है, लेकिन औद्योगिक विकास होगा, तो विकास किसका होगा, पहले यह सुनिश्चित करे सरकार.

झारखंड के पहले मुख्यमंत्री ने जान देंगे और जमीन नहीं देंगे के नारा को दुहराते हुए कहा कि इस चक्कर में जान भी चली जाती है और जमीन भी नहीं बचती. ऐसे में जमीन के बदले जमीन लेने, पुर्नवास, जमीन पर लगने वाले कल-कारखानों से उत्पाद में हिस्सा और कंपनियों में 85 फीसदी आदिवासी समुदाय के लोगों को नियुक्त करने की मांग हम सरकार से करेंगे.

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आदिवासी बुद्धिजीवी विचार मंच के एक दिवसीय सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री बाबुलाल
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उन्होंने कहा कि सरकार किसी की भी बने इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, अभी जरुरत है कि उजड़ते हुए समाज को सुरक्षित और संरक्षित रखा जाए. गरीब, किसान, आदिवासी एवं मजदूर तबके जैसे कमजोर वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए हमें सरकार पर दबाव बनाना पड़ेगा. कमजोर वर्ग के लोग महंगे शिक्षा से वंचित हो जा रहे हैं. सरकार से जमीन के बदले करार करवाना होगा कि योग्यता के आधार पर बच्चों के शिक्षा का खर्च वो उठाएंगे. उन्होंने वर्तमान सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि सरकार नई-नई घोषणा कर रही है. लोगों को मंत्र-मुग्ध कर जादूगर जैसा मैजिक शो दिखा रही हैं. उन्होंने वर्तमान सरकार के केंद्र बिन्दू में कमजोर नहीं होने का आरोप लगाया. बाबुलाल ने मौजूद सरकार को गरीब विरोधी करार दिया. उन्होंने स्कूल मर्ज करने के एक्ट में संशोधन, भूमि बैंक सहित अन्य का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार कमजोर वर्ग के लोगों को शिक्षा एवं जमीन बचाने का गारंटी ले.

सम्मेलन का संचालन प्रमंडलीय अध्यक्ष सरजन हांसदा ने किया. इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर उरांव, मंच अध्यक्ष प्रेम मुर्मू, करमा उरांव, एम एल एन उरांव, पानेशल टुडू, सतीश सोरेन, दानियल मुर्मू, बाबुराम मुर्मू, नंदलाल सोरेन, जीत उरांव, दिनेश उरांव, डॉ सुनील मरांडी, डा चंदन मुर्मू, लुखु हेम्ब्रम, पुष्पा सोरेन, नरेश मुर्मू, डॉ सुशील मरांडी आदि उपस्थित थे. कार्यक्रम का सफल आयोजन में श्यामदेव हेम्ब्रम, जोसेफ बास्की, एमानुवेल सोरेन आदि की सरहानीय भूमिका रही.