तो हिमाचल में इस तरह से मनाई जाती है बैसाखी, पढ़ें पूरी कहानी

मंडी. खेती किसानी और ख़ुशी से जुड़े बैसाखी का त्यौहार हिमाचल में बसोआ पर्व के नाम से जाना जाता है. वहीं हिमाचली लोकगीतों में भी बसोआ के करूण स्वर गूंज उठते हैं. बेटियों के दर्द के साथ जुड़ा बसोआ पर्व मंडी जिला के सरकाघाट उपमंडल के पिंगला गांव से जुड़ा है. वहीं पर ऐतिहासिक रिवालसर झील और अन्य पवित्र स्थलों पर इस दौरान मेलों का आयोजन होता है.

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पंजाब में तो बैशाखी के अवसर पर ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्दा की धूम रहती है, लेकिन हिमाचल में बसोआ पर्व एक बेटी के दर्द की कहानी को बयां करता है. कहते हैं कि पिंगला की लौहला नामक बेटी की शादी उसका बाप किसी बूढ़े के साथ तय कर देता है. उसके बदले में उस दौरान की प्रथा के अनुसार बरीणा के रूप में पैसे ले लेता है. मगर बेटी को यह बात नागवार गुजरी उसने जिस दिन बारात आने वाली थी उसी दिन गांव में स्थित नाले में छलांग लगाकर आत्म हत्या कर ली.

गाये जाते हैं गीत

इस घटना के बाद से मंडी जनपद में बेटियों का बरीणा लेने की प्रथा का सदा-सदा के लिए अंत हो गया. लेकिन एक बेटी के बलिदान की टीस सदा के लिए लोगों के मन में रह गई. जिसे आज भी लोग लोकगीत के रूप में गुनगुनाते हैं, ‘बसोए रा ध्याड़ा बापुआ जुगा जुगा जो याद रैहणा मेरे बापुआ.’ इसी गीत में एक नसीहत भी लोगों के लिए है, ‘हुण देखया खांदे लोका धीउआ रा बरीणा मुश्किल हुई जांदा बेटिया रा जीणा हटीके नी पिंगले जो आवणा बापुआ.’ वहीं पर चंबा जनपद में भी बसोआ गीत कुछ इस तरह से है, ‘आया बसोआ नी माये पंजे सत्ते मुंजो सादा नी आया कोय.’

लगता है मेला

बसोआ पर्व के दौरान पिंगला में देव लक्ष्मीनारायण का मेला लगता है. इसी दौरान लौहला की याद में गुड्डे-गुड़ियां बनाकर उन्हें झील में प्रवाहित किया जाता है. जबकि त्रिवेणी धर्म स्थली रिवालसर में मेले का आयोजन होता है. इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु रिवालसर में स्नान करते हैं. जिले के अन्य धार्मिक स्थलों पर भी स्नान करने की परंपरा है.

ब्रीणा नाम से बनी है फिल्म

मंडी जनपद की इस मार्मिक कहानी पर मुंबई में मंडी के निर्देशक पवन शर्मा ने ब्रीणा नाम से ही हिमाचल की पहली हिंदी फिल्म का निर्माण किया है. संयोगवश 13 अप्रैल को ही इस फिल्म को रिलीज किया जा रहा है. इससे पूर्व यह फिल्म राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार जीत चुकी. इस फिल्म की शूटिंग मंडी की सराजघाटी के जंजैहली क्षेत्र में हुई है.