कंधों के सहारे प्रसूता को लाओ, पर डॉक्टर नहीं मिलेगा, ये है हिमाचल का ‘बंजार’

जिला कुल्लू के बंजार विधानसभा क्षेत्र की जनता नारकीय जीवन... - Panchayat Times

कुल्लू. जिला कुल्लू के बंजार विधानसभा क्षेत्र की जनता नारकीय जीवन जीने को विवश है. बंजार की 80 फीसदी आबादी दुर्गम क्षेत्रों में रहती है और यहां मूलभूत सुविधा का अभाव है. बंजार की तीर्थन घाटी के कई गांवों में आज भी सड़कें नहीं पहुंची है. जहां सड़कें पहुंची है तो वहां अस्पताल तो है लेकिन उपचार के लिए डॉक्टर नहीं है. सड़क न होने के कारण लोगों को बीमारी की हालत में उपचार के बारे में सौ बार सोचना पड़ता है. यहां कितनी ही जिंदगियां बिना इलाज के ही दम तोड़ देती हैं.

प्रसव पीड़ा के चलते लकड़ी के डंडों के सहारे लाया गया

कुछ लोगों को गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचाना हो तो लकड़ी की पालकी बनाकर उसमें बिठाकर मुख्य सड़क तक लाया जाता है. प्रसूता महिलाओं के लिए बेशक सरकार ने मुफ्त एम्बूलेंस की व्यवस्था कर रखी हो लेकिन यहां तो दो कंधों के सहारे प्रसूता महिला को अस्पताल तक पहुंचाया जाता है. इतना कष्ट करने के बाद भी अस्पताल में डॉक्टर न मिले तो जनता सिर पर हाथ रखकर अपने किस्मत को कोसती है. तीर्थन घाटी की नोहंडा पंचायत का भी यही हाल है. शलिंगा गांव की एक महिला को प्रसव पीड़ा के चलते लकड़ी के डंडों के सहारे लाया गया लेकिन दुखद बात ये है कि तीर्थन घाटी में एक मात्र अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिला.

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घाटी के कुछ लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस मामले को उठाना शुरू किया है. इस इलाके के लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि जमीनी स्तर पर काम ठप है और सत्ता पक्ष के लोग अभी भी जनता को बेवकूफ बना रहे हैं और कह रहे हैं ‘बदल रहा है बंजार’